आपदा से लड़ने की तैयारी: उत्तराखंड के 5 जिलों में महा-मॉक ड्रिल, परखा गया राहत एवं बचाव तंत्र

देहरादून: उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के दिशा-निर्देशन में प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और संभावित आपदाओं से निपटने के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का भव्य आगाज हुआ। अभियान के प्रथम चरण में आज बागेश्वर, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और नैनीताल जनपदों में व्यापक स्तर पर बहु-स्थलीय युद्धाभ्यास आयोजित किए गए।

यह पहली बार है जब जनपदों ने स्वयं अपने स्तर पर इस मॉक ड्रिल का सफल संचालन किया, जिससे स्थानीय प्रशासन की आत्मनिर्भरता और तत्परता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

इन चुनौतियों का किया गया ‘यथार्थपरक’ अभ्यास

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से इन अभ्यासों की निरंतर निगरानी की गई। मॉक ड्रिल के दौरान वास्तविक आपदा जैसे परिदृश्य तैयार किए गए, जिनमें प्रमुख थे:

  • भूकम्प और भूस्खलन: मलबे में फंसे लोगों को निकालना।

  • सड़क दुर्घटना: खाई या दुर्गम क्षेत्रों में गिरे वाहनों से रेस्क्यू।

  • बाढ़ और बांध रिसाव: नदी तटीय क्षेत्रों से सुरक्षित निकासी।

  • वनाग्नि और वन्यजीव हमला: आग पर नियंत्रण और घायलों का उपचार।

विभागीय समन्वय और ‘गोल्डन ऑवर’ पर जोर

इस अवसर पर सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आपदा के समय ‘गोल्डन ऑवर’ (घटना के तुरंत बाद का समय) में त्वरित प्रतिक्रिया जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस अभ्यास से पुलिस, NDRF, SDRF, फायर सर्विस, स्वास्थ्य और राजस्व विभागों के बीच समन्वय और अधिक सुदृढ़ हुआ है।

जनपदवार प्रमुख गतिविधियाँ:

जनपद प्रमुख मॉक ड्रिल परिदृश्य मुख्य आकर्षण
उत्तरकाशी मनेरी भाली बांध रिसाव, सिलक्यारा सुरंग धंसना सुरंग के भीतर फंसे यात्रियों का विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन।
पौड़ी नदी जलस्तर वृद्धि, बस दुर्घटना, वनाग्नि थलीसैंण में भूस्खलन के दौरान घायलों को एयरलिफ्ट करना।
बागेश्वर भूकंप, भूस्खलन और गुलदार का हमला डिग्री कॉलेज और गरुड़ क्षेत्र में सघन बचाव अभियान।
रुद्रप्रयाग सोनप्रयाग भूस्खलन और वनाग्नि यात्रा मार्ग के संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई का अभ्यास।

विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन्स

  • उत्तरकाशी: सिलक्यारा क्षेत्र में सुरंग धंसने का कृत्रिम परिदृश्य तैयार किया गया, जहाँ तकनीकी टीमों ने मलबे के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का चुनौतीपूर्ण अभ्यास किया।

  • पौड़ी: कोटद्वार में बाढ़ प्रभावितों को बचाने और थलीसैंण में गंभीर घायलों को हवाई मार्ग (एयरलिफ्ट) से अस्पताल पहुँचाने की प्रक्रिया को दोहराया गया।

  • बागेश्वर: यहाँ कांडा क्षेत्र में न केवल आग बल्कि ‘गुलदार के हमले’ जैसी अनूठी स्थिति में बचाव कार्य का प्रदर्शन किया गया।

उपस्थिति

मॉक अभ्यास के दौरान अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, प्रशासन के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री महावीर सिंह चौहान सहित USDMA के विशेषज्ञों और जिलाधिकारियों ने कंट्रोल रूम से पल-पल की निगरानी की।

इस दो दिवसीय अभ्यास का उद्देश्य आपदा के समय होने वाली कमियों की पहचान करना और उपलब्ध संसाधनों (Response System) को हर वक्त अलर्ट मोड पर रखना है। ऐसे अभ्यासों से भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए उत्तराखंड प्रशासन की क्षमता और अधिक निखरेगी।

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