उत्तराखण्ड बनेगा देश का ‘साइंटिफिक मॉडल’: मुख्य सचिव ने ‘लैब ऑन व्हील्स’ और ‘मेंटरशिप’ कार्यक्रमों को विस्तार देने के दिए निर्देश

देहरादून | 24 फरवरी, 2026

उत्तराखण्ड में वैज्ञानिक चेतना को जागृत करने और तकनीक आधारित इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) की सामान्य महासभा (General Body) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और उद्यमियों ने राज्य में ‘साइंटिफिक टेंपरामेंट’ विकसित करने के रोडमैप पर चर्चा की।

विज्ञान का लोकव्यापीकरण: ‘विज्ञान वाणी’ की गूँज

बैठक में परिषद की उपलब्धियों को साझा करते हुए महानिदेशक श्री दुर्गेश पंत ने बताया कि राज्य में 88.8 मेगाहर्ट्ज़ पर ‘विज्ञान वाणी’, ‘विज्ञान दृश्यम’ और ‘विज्ञान धारा’ जैसे कार्यक्रमों का सफल संचालन किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि रेडियो और दृश्य माध्यमों से विज्ञान का लोकव्यापीकरण (Popularization) ग्रामीण क्षेत्रों तक वैज्ञानिक सोच पहुँचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

STEM शिक्षा और मेंटरशिप पर जोर

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों में STEM (Science, Technology, Engineering, and Mathematics) विषयों के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए विशेष मेंटरशिप कार्यक्रम चलाए जाएं।

  • SOP का निर्माण: वैज्ञानिक संस्थानों को निर्देश दिए गए कि वे प्रभावी मेंटरशिप के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करें।

  • संवाद के माध्यम: विद्यालयों में विज्ञान संवाद, पॉडकास्ट और साइंस पत्रिकाओं के माध्यम से छात्रों को शोध और नवाचार से जोड़ा जाए।

‘लैब ऑन व्हील्स’ का होगा विस्तार

प्रदेश के सभी 13 जनपदों में संचालित ‘लैब ऑन व्हील्स’ (चलती-फिरती विज्ञान प्रयोगशाला) के परिणामों को उत्साहजनक बताते हुए मुख्य सचिव ने इसे अपग्रेड करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों के दूरस्थ विद्यालयों तक इस सुविधा को और अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जाए ताकि वहां के छात्र भी आधुनिक लैब का अनुभव ले सकें।

जिला स्तर पर विज्ञान केंद्रों की स्थापना

बैठक में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान केंद्रों की प्रगति पर विचार-विमर्श हुआ:

  1. मानसखंड साइंस सेंटर (अल्मोड़ा): कुमाऊं क्षेत्र में वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इसे महत्वपूर्ण केंद्र बताया गया।

  2. चंपावत विज्ञान केंद्र: सीमांत जनपद में नवाचार को गति देने के लिए इसकी स्थापना पर चर्चा हुई।

  3. नवाचार केंद्र: प्रत्येक जनपद में ‘इनोवेशन हब’ स्थापित करने की योजना पर विशेषज्ञों ने अपने सुझाव साझा किए।

बैठक में उपस्थित दिग्गज विशेषज्ञ

इस उच्चस्तरीय बैठक में तकनीक और शिक्षा जगत की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की, जिनमें:

  • आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत।

  • भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (IIP) के निदेशक श्री हरेंद्र सिंह बिष्ट।

  • पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान।

  • सचिव श्री नितेश झा, श्री रंजीत सिन्हा और श्री रविनाथ रामन सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी।

मुख्य सचिव ने अंत में दोहराया कि उत्तराखण्ड को एक आदर्श वैज्ञानिक इकोसिस्टम मॉडल के रूप में विकसित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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