नरभक्षी गुलदार का खौफ: पौड़ी के पोखड़ा और बीरोंखाल में स्कूलों की छुट्टी, सुरक्षा के लिए प्रशासन अलर्ट

पौड़ी गढ़वाल: जनपद पौड़ी के पोखड़ा और बीरोंखाल विकासखंडों में नरभक्षी गुलदार के बढ़ते आतंक ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के निर्देशों पर संवेदनशील क्षेत्रों के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है। यह निर्णय क्षेत्र में गुलदार की सक्रियता और बच्चों के आवागमन के दौरान होने वाले संभावित खतरों को देखते हुए लिया गया है।

इन विद्यालयों में रहेगा अवकाश

खंड शिक्षा अधिकारी (पोखड़ा एवं बीरोंखाल) मनोज कुमार जोशी ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से 04 अप्रैल 2026 (शनिवार) और 06 अप्रैल 2026 (सोमवार) को चिह्नित विद्यालयों में छुट्टी रहेगी।

  • न्याय पंचायत कोलाखाल (पोखड़ा): राजकीय प्राथमिक विद्यालय पाटल्यूं, मयलगांव, पटोटी और जनता इंटर कॉलेज कुण्जखाल (कक्षा 1 से 12 तक) बंद रहेंगे।

  • विकासखंड बीरोंखाल: राजकीय प्राथमिक विद्यालय तिमली, कण्डूली बड़ी, ढिस्वाणी, भरपूर बड़ा और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय तिमली एवं कण्डूली बड़ी (कक्षा 1 से 8 तक) में अवकाश घोषित किया गया है।

विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि

प्रशासन का मानना है कि पहाड़ी रास्तों से होकर स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए गुलदार का खतरा सबसे अधिक रहता है। खंड शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय क्षेत्र की विषम परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। उन्होंने सभी संबंधित विद्यालय प्रशासनों को इन आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

ग्रामीणों में दहशत और वन विभाग की कार्रवाई

क्षेत्र में गुलदार के आतंक के कारण ग्रामीण शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से नरभक्षी गुलदार को जल्द से जल्द पकड़ने या ढेर करने की मांग की है। हालांकि प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी कर तात्कालिक राहत दी है, लेकिन क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा और गुलदार के आतंक से मुक्ति के लिए वन विभाग की गश्त और पिंजरे लगाने की प्रक्रिया को और तेज करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

पौड़ी जिला प्रशासन द्वारा स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाया गया यह कदम सराहनीय है। “जान है तो जहान है” की नीति पर चलते हुए, नरभक्षी के पकड़े जाने तक अभिभावकों को भी बच्चों की निगरानी करने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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