देहरादून | 07 जनवरी 2026
क्लेमेंटटाउन, देहरादून में आज “फोर्टिफाइंग द हिमालयाज: ए प्रोएक्टिव मिलिट्री-सिविल-सोसाइटी फ्यूजन स्ट्रेटजी इन द मिडिल सेक्टर”विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग कर हिमालयी सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर अपने विचार साझा किए।
हिमालय केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रणाली: राज्यपाल
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालय एक जीवंत रणनीतिक प्रणाली है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि भारत-चीन सीमा के ‘मध्य सेक्टर’ को पारंपरिक रूप से शांत माना जाता रहा है, लेकिन वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य निरंतर सतर्कता की मांग करता है।
राज्यपाल द्वारा रेखांकित मुख्य बिंदु:
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हाइब्रिड वारफेयर की चुनौती: आधुनिक सुरक्षा चुनौतियां अब केवल प्रत्यक्ष युद्ध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें ग्रे-जोन गतिविधियां और द्वि-उपयोगी इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे कारक शामिल हैं।
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वाइब्रेंट विलेज: सीमावर्ती गांव राष्ट्रीय सुरक्षा का ‘बलवर्धक’ (Force Multipliers) हैं। स्थानीय समुदाय केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सुरक्षा के सहभागी हैं।
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बुनियादी ढांचा और तकनीक: सड़कें, सुरंगें (जैसे चारधाम परियोजना) और ड्रोन/AI जैसी आधुनिक तकनीक सैन्य तत्परता के लिए अनिवार्य हैं।
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पर्यावरण संतुलन: हिमालय में पारिस्थितिक क्षरण का सीधा असर सैन्य लॉजिस्टिक्स और आपदा प्रबंधन पर पड़ता है, इसलिए विकास और पर्यावरण में संतुलन जरूरी है।
सीमांत गांव के नागरिक देश के “आंख और कान”: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने संगोष्ठी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सेना, नागरिक प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल राष्ट्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
मुख्यमंत्री के संबोधन की प्रमुख बातें:
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प्रथम ग्राम का गौरव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमावर्ती गांवों को ‘अंतिम’ नहीं बल्कि ‘पहला’ गांव माना गया है। माणा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों का दौरा कर प्रधानमंत्री ने इस विजन को स्पष्ट किया है।
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साझा दायित्व: राष्ट्र की सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। सीमा के पास रहने वाले लोग देश की “आंख और कान” बनकर राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देते हैं।
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रणनीतिक नीति: इस सेमिनार से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड की सामरिक नीति को सुदृढ़ बनाने और हिमालयी विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।
सुरक्षा का ‘फ्यूजन’ मॉडल
संगोष्ठी का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि जब सैन्य बल, नागरिक प्रशासन और समाज एक इकाई के रूप में कार्य करते हैं, तभी हिमालयी सीमाएं सुरक्षित और स्थिर रह सकती हैं। ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के माध्यम से पलायन रोकना और वहां बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना इस रणनीति का मुख्य हिस्सा है।
संगोष्ठी के मुख्य स्तंभ (Key Pillars):
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सैन्य क्षमता: परिचालन तत्परता और आधुनिक तकनीक।
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नागरिक प्रशासन: सीमा क्षेत्रों में आधारभूत संरचना का विकास।
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समाज: स्थानीय समुदायों का सशक्तिकरण और जनसंख्या स्थिरता।
