देहरादून: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को पावन पर्व मकर संक्रांति एवं उत्तरायणी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इस शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री ने देवभूमि की जनता के सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना की है।
सांस्कृतिक विविधता में एकता का संगम
अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि मकर संक्रांति का यह पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस अटूट विविधता और एकता का प्रतीक है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों और परंपराओं के माध्यम से अभिव्यक्त होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पर्व उत्तर से दक्षिण तक समूचे भारत को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है।
प्रकृति और अध्यात्म का सामंजस्य
मुख्यमंत्री ने पर्व के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
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सूर्य उपासना: यह पर्व भगवान सूर्य देव की आराधना और ऊर्जा का उत्सव है।
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ऋतु परिवर्तन: उत्तरायणी सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जो प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने का संदेश देता है।
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कर्म की प्रेरणा: यह हमें जीवन में सकारात्मक सोच के साथ निरंतर अपने ‘कर्म पथ’ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा प्रदान करता है।
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शुभ कार्यों का प्रारंभ: हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, यह पावन समय सभी मांगलिक कार्यों के शुभारंभ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
“उत्तरायणी पर्व उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान का एक अभिन्न अंग है। यह हमारी सामाजिक समरसता, लोक परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करने का माध्यम है।” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
प्रगति और समृद्धि का संकल्प
मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि यह उत्तरायणी कौतिक और मकर संक्रांति प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का संचार करेगी। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के अपने संकल्प को दोहराते हुए कामना की कि प्रदेश निरंतर प्रगति और समृद्धि के पथ पर तेजी से आगे बढ़ता रहे।
उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाले उत्तरायणी मेलों का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे लोक संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बताया।
