देहरादून | 16 जनवरी, 2026
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार’ प्रदेश में पारदर्शिता और त्वरित समाधान का एक सशक्त मॉडल बन गया है। 15 जनवरी 2026 तक की दैनिक प्रगति रिपोर्ट दर्शाती है कि सरकार अब केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे जनता की चौखट पर पहुँचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रही है।
आंकड़ों में सफलता: शिविरों से मिला सीधा लाभ
प्रशासनिक सेवाओं को जनता तक पहुँचाने के लिए प्रदेश के सभी जनपदों में व्यापक स्तर पर शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
प्रमुख उपलब्धियाँ (15 जनवरी 2026 तक):
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शिविरों का आयोजन: अब तक प्रदेश भर में 347 शिविर लगाए जा चुके हैं।
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जन सहभागिता: इन शिविरों में 2,77,654 नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
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शिकायतों का निस्तारण: कुल दर्ज 22,293 शिकायतों में से 18,973 का मौके पर ही सफल निस्तारण किया गया।
सेवा वितरण और सामाजिक सुरक्षा
सरकार न केवल शिकायतों को सुन रही है, बल्कि विभिन्न विभागों की सेवाओं और प्रमाण पत्रों का वितरण भी इन शिविरों के माध्यम से सुनिश्चित कर रही है।
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प्रत्यक्ष लाभ: अब तक 38,255 नागरिकों को विभिन्न सरकारी प्रमाण पत्र और सेवाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
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कल्याणकारी योजनाएं: राज्य सरकार की अन्य योजनाओं से लाभान्वित होने वालों की संख्या में भारी उछाल आया है। पूर्व दिवस तक यह संख्या 1,38,011 थी, जिसमें आज 13,554 नए लाभार्थी जुड़े।
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कुल लाभार्थी: अब तक कुल 1,51,565 नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जा चुका है।
मुख्यमंत्री का विजन: “अंतिम पंक्ति तक पहुँचे शासन”
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्यक्रम की सफलता पर खुशी जताते हुए इसे जनता और सरकार के बीच “विश्वास का सेतु” बताया है।
“हमारा उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक शासन की सेवाओं की सीधी पहुँच हो। ‘जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार’ अभियान सुशासन और पारदर्शिता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
एक प्रभावी गवर्नेंस मॉडल
यह कार्यक्रम उत्तराखंड सरकार की उस नई कार्यसंस्कृति को रेखांकित करता है जहाँ जनसंवाद और त्वरित निर्णय को सर्वोपरि रखा गया है। भ्रष्टाचार मुक्त शासन और जवाबदेही तय करने की दिशा में यह अभियान मील का पत्थर साबित हो रहा है।
अभियान की विशेषताएं:
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त्वरित समाधान: शिकायतों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं।
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पारदर्शिता: जनता के सामने ही आवेदनों पर निर्णय।
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सुविधा: सभी विभाग एक ही छत के नीचे (Single Window Approach)।
प्रदेश भर से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया यह सिद्ध करती है कि धामी सरकार का यह ‘डोर-स्टेप डिलीवरी’ मॉडल आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी सुशासन की एक मिसाल बनेगा।
