शिमला | 19 जनवरी, 2026
हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह समय सामान्य नवरात्रि की तुलना में अधिक गोपनीय साधना और तंत्र शक्ति की उपासना के लिए जाना जाता है। गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन मां तारा के पूजन का विधान है। जब बात मां तारा की आती है, तो हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के पास स्थित ‘तारा देवी मंदिर’ का नाम श्रद्धा के साथ लिया जाता है, जहां भक्त मां के साक्षात स्वरूप का अनुभव करते हैं।
समुद्र तल से 7,200 फीट की ऊंचाई पर शक्तिपीठ
शिमला शहर से लगभग 13 किलोमीटर दूर शोघी हाईवे पर स्थित यह मंदिर प्रकृति की गोद में बसा है। 7,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहाँ से हिमालय की बर्फीली चोटियों और घने जंगलों का 360 डिग्री पैनोरमिक नजारा दिखता है। मंदिर तक पहुँचने का रास्ता घुमावदार और सुंदर है, जो श्रद्धालुओं को एक आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है।
राजा के स्वप्न से हुई मंदिर की स्थापना
इस प्राचीन मंदिर का इतिहास लगभग 250 वर्ष पुराना है। लोक कथाओं के अनुसार:
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स्वप्न दर्शन: सेन राजवंश के राजा भूपेंद्र सेन को मां तारा ने स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर निर्माण का आदेश दिया था।
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मूर्ति की स्थापना: राजा ने तत्काल मंदिर बनवाया। बाद में उनके वंशज बलवीर सेन ने मंदिर में अष्टधातु से निर्मित मां तारा की भव्य प्रतिमा स्थापित की।
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कुलदेवी का वास: आज भी मां तारा यहाँ सेन राजवंश और स्थानीय निवासियों की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं।
वास्तुकला: पहाड़ी शैली का अद्भुत संगम
तारा देवी मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि वास्तुशिल्प का भी उत्कृष्ट उदाहरण है:
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निर्माण सामग्री: मंदिर पारंपरिक पहाड़ी शैली में लकड़ी और पत्थर से बना है।
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नक्काशी: मंदिर के दरवाजों और खंभों पर की गई जटिल नक्काशी स्थानीय कारीगरों की निपुणता को दर्शाती है।
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स्लेट की छत: हिमाचल की प्राचीन परंपरा के अनुसार, मंदिर की छत स्लेट से बनी है, जो इसे एक ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करती है।
गुप्त नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान
गुप्त नवरात्रि के दौरान यहाँ का वातावरण और भी अधिक भक्तिमय हो जाता है। साधक और श्रद्धालु यहाँ आकर विशेष अनुष्ठान, जप और पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यहाँ श्रद्धापूर्वक मांगी गई हर मनोकामना—चाहे वह संतान प्राप्ति हो, स्वास्थ्य हो या आर्थिक समृद्धि—मां तारा अवश्य पूरी करती हैं।
भक्तों के लिए सुविधा: मंदिर प्रबंधन द्वारा विशेष अवसरों पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। हाल ही में पर्यटन विभाग ने यहाँ एक नया भव्य परिसर भी तैयार किया है, जो आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक शैली को संजोए हुए है।
कैसे पहुँचें?
यदि आप शिमला की यात्रा पर हैं, तो शोघी से होते हुए आप सड़क मार्ग से यहाँ आसानी से पहुँच सकते हैं। यह स्थान न केवल धार्मिक पर्यटन के लिए बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी स्वर्ग के समान है।
