फेंके नहीं, सेहत संवारें: केले का छिलका है ‘सुपरफूड’, जानें इसके चमत्कारी फायदे

नई दिल्ली | 19 जनवरी, 2026

अक्सर हम केला खाने के बाद उसके छिलके को बेकार समझकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिसे आप कचरा समझ रहे हैं, वह असल में पोषक तत्वों का खजाना है? हालिया वैज्ञानिक शोधों और अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि केले का छिलका सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

गूदे से ज्यादा छिलके में है दम

हैरानी की बात यह है कि केले के छिलके में फल के गूदे (pulp) की तुलना में अधिक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। शोध के अनुसार, इसमें गैलोकैटेचिन (Gallocatechin) नामक एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो शरीर को गहराई से डिटॉक्स करने और रोगों से लड़ने की क्षमता (Immunity) बढ़ाने में मदद करता है।

गंभीर बीमारियों से सुरक्षा

केले के छिलके में मौजूद फ्लेवोनोइड्स, टैनिन और सैपोनिन जैसे कंपाउंड्स फ्री रेडिकल्स से मुकाबला करते हैं। ये फ्री रेडिकल्स शरीर में कैंसर, हृदय रोग और समय से पहले बुढ़ापा लाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। छिलके का नियमित और सही उपयोग इन जोखिमों को कम कर सकता है।

खतरनाक बैक्टीरिया का काल

छिलके में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुण इसे एक प्राकृतिक औषधि बनाते हैं:

  • संक्रमण से बचाव: यह ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया को नष्ट करने में सक्षम है, जो पेट दर्द, दस्त और बुखार का कारण बनते हैं।

  • ओरल हेल्थ: दांतों और मसूड़ों में संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया पर भी यह प्रभावी असर दिखाता है।

  • फंगल इंफेक्शन: इसमें मौजूद गैलिक एसिड और फेरुलिक एसिड फंगल इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं।

कैसे करें इस्तेमाल? (Expert Tips)

विशेषज्ञों का मानना है कि केले के छिलके को अच्छी तरह धोकर निम्नलिखित तरीकों से उपयोग में लाया जा सकता है:

  1. स्मूदी और चाय: छिलके को उबालकर उसकी चाय बनाई जा सकती है या स्मूदी में ब्लेंड किया जा सकता है।

  2. बेकिंग: इसे केक या मफिन के बैटर में बारीक पीसकर डाला जा सकता है।

  3. स्किन केयर: घरेलू फेस मास्क के रूप में चेहरे पर रगड़ने से मुँहासे कम होते हैं और त्वचा में निखार आता है।

सावधानी: यदि आपको किसी प्रकार की एलर्जी है, तो इसके सेवन या त्वचा पर इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

केले का छिलका कचरा नहीं, बल्कि प्रकृति का दिया हुआ एक सुरक्षा कवच है। अगली बार केला खाने के बाद छिलका फेंकने से पहले अपनी सेहत के बारे में जरूर सोचें।

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