देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और “अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के उत्थान” के दृष्टिकोण ने उत्तराखंड में सुशासन की एक नई मिसाल पेश की है। प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न सेवा एवं जागरूकता अभियानों, विशेषकर ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम को जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है।
राज्य सरकार की सक्रिय नीतियों के चलते प्रशासन अब खुद जनता के दरवाजे तक पहुँच रहा है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ लेना पहले से कहीं अधिक सुलभ हो गया है।
आंकड़ों में सफलता की कहानी
हाल ही में प्रदेशभर में आयोजित किए गए कैंपों के आंकड़े सरकार की कार्यक्षमता और जनहितकारी नीतियों की सफलता पर मुहर लगाते हैं:
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दैनिक उपलब्धि: आज प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कुल 14 कैंप आयोजित किए गए।
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आज के लाभार्थी: इन कैंपों में एक ही दिन में 6,368 लोगों ने प्रतिभाग कर सरकारी सेवाओं का सीधा लाभ उठाया।
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कुल प्रगति: मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में अब तक प्रदेशभर में 474 कैंपों का सफल आयोजन किया जा चुका है।
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ऐतिहासिक प्रभाव: इन अभियानों के माध्यम से अब तक कुल 3,77,358 नागरिक लाभान्वित हुए हैं।
त्वरित निस्तारण और सीधा संवाद
इन कैंपों की सबसे बड़ी विशेषता सेवाओं का त्वरित निस्तारण है। प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर समाज कल्याण की योजनाओं के पंजीकरण तक, आम जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय एक ही छत के नीचे समाधान मिल रहा है।
“हमारी सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। इन कैंपों के माध्यम से न केवल जनसमस्याओं का समाधान हो रहा है, बल्कि आम जनता और शासन के बीच की दूरी भी कम हुई है।” — श्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
अधिकारियों को सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने इस अभियान की सफलता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन शिविरों को और अधिक व्यापक और प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में इन अभियानों का दायरा बढ़ाया जाएगा ताकि राज्य का कोई भी पात्र नागरिक सुविधाओं से वंचित न रहे।
कैंपों के माध्यम से मिलने वाली प्रमुख सुविधाएँ:
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सरकारी योजनाओं के लिए पंजीकरण।
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स्वास्थ्य जाँच एवं परामर्श।
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राजस्व एवं भूमि संबंधी मामलों का निस्तारण।
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विभिन्न प्रमाण पत्रों (आय, जाति, निवास) हेतु आवेदन।
मुख्यमंत्री धामी के इस ‘मॉडल ऑफ गवर्नेंस’ ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो विकास और सेवा को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना संभव है।
