देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आज हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड की प्रगति के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी है। सरकार ने जहाँ एक ओर सरकारी कर्मचारियों की पुरानी मांग को पूरा किया है, वहीं दूसरी ओर भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए ‘हरित हाइड्रोजन नीति 2026’ को हरी झंडी दे दी है।
1. स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए ‘म्युचुअल ट्रांसफर’ की सुविधा
सरकार ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों को बड़ी राहत दी है। अब वे अपने संपूर्ण सेवाकाल में एक बार म्युचुअल अंडरस्टैंडिंग (आपसी सहमति) के आधार पर जनपद परिवर्तन कर सकेंगे। इसके लिए शर्त यह है कि उन्होंने अपने मूल संवर्ग में कम से कम 05 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी कर ली हो।
2. भूमि अर्जन की प्रक्रिया हुई सरल
राज्य की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए अब भू-स्वामियों से आपसी समझौते के आधार पर भूमि प्राप्त की जा सकेगी।
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लाभ: इससे ‘भूमि अर्जन अधिनियम 2013’ के तहत लगने वाले अत्यधिक समय और मुकदमेबाजी में कमी आएगी।
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प्रभाव: जनहित की परियोजनाओं की लागत कम होगी और विकास कार्यों में गति आएगी।
3. औद्योगिक विस्तार: ऊधमसिंहनगर में सिडकुल का प्रसार
ऊधमसिंहनगर स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि अब सिडकुल को हस्तान्तरित की जाएगी।
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शर्त: भूमि का उपयोग 3 वर्ष के भीतर करना अनिवार्य होगा।
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नियम: पट्टेदार भूमि को बेच नहीं सकेगा, हालांकि राजस्व विभाग की सहमति से इसे ‘सबलेट’ करने का अधिकार होगा।
4. हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण
कैबिनेट ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए दो प्रमुख पर्यावरणीय निर्णय लिए हैं:
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उत्तराखंड हरित हाइड्रोजन नीति, 2026: राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी दी गई है।
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भू-जल दोहन पर नियंत्रण: उद्योगों, होटलों और आवासीय सोसायटियों द्वारा भू-जल के अनियंत्रित इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए नई दरें और ₹5000 का पंजीकरण शुल्क लागू किया गया है।
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5. शिक्षा और हवाई पट्टियों का आधुनिकीकरण
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नया विश्वविद्यालय: देहरादून में ‘जी.आर.डी. उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय’ की स्थापना को मंजूरी दी गई है। इससे उत्तराखंड ‘एजुकेशन हब’ के रूप में और सुदृढ़ होगा।
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रक्षा और नागरिक सुरक्षा: चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टी को अब भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर एडवांस लैंडिंग ग्राउण्ड (ALG) के रूप में विकसित किया जाएगा। यह नागरिक और सैन्य संचालन दोनों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
6. जनजाति कल्याण का सुदृढ़ीकरण
जनजाति बहुल क्षेत्रों (देहरादून, चमोली, ऊधमसिंहनगर और पिथौरागढ़) में विभागीय ढांचे को पुनर्गठित किया गया है। उत्तराखण्ड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2025 को प्रख्यापित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे इन क्षेत्रों के विकास कार्यों की बेहतर निगरानी हो सकेगी।
आज के कैबिनेट फैसले स्पष्ट करते हैं कि धामी सरकार का फोकस ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ दोनों पर है। जहाँ एक तरफ स्वास्थ्य और जनजाति कल्याण पर ध्यान दिया गया है, वहीं रक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भविष्य की तैयारी की गई है।
