उत्तरकाशी: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री धाम के बाद अब यमुनोत्री धाम में भी गैर-हिंदुओं (गैर-सनातनियों) के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली गई है। यमुनोत्री मंदिर समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि इस वर्ष यात्रा शुरू होने के साथ ही धाम की मर्यादा बनाए रखने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएंगे।
चोरी और अभद्रता की शिकायतों के बाद फैसला
यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से धाम परिसर में चोरी और तीर्थयात्रियों के साथ अभद्रता की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन घटनाओं को देखते हुए मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कड़ा कदम उठाना आवश्यक हो गया है।
प्रमुख बिंदु: मंदिर समिति का रुख
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पूर्ण प्रतिबंध: इस वर्ष कपाट खुलने के बाद से यमुनोत्री धाम में गैर-सनातनियों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा।
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प्रशासन को पत्र: प्रवक्ता उनियाल ने बताया कि समिति इस निर्णय के संबंध में जल्द ही जिलाधिकारी (DM) को पत्र सौंपेगी ताकि इसे आधिकारिक तौर पर लागू किया जा सके।
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सुरक्षा और मर्यादा: निर्णय का मुख्य उद्देश्य मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा को बनाए रखना और असामाजिक तत्वों पर लगाम लगाना है।
“हमें धाम में लगातार चोरी और श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार की खबरें मिल रही थीं। धाम की पवित्रता सर्वोपरि है, इसीलिए इस बार की यात्रा से गैर-सनातनियों का प्रवेश वर्जित रखने का निर्णय लिया गया है।”
— पुरुषोत्तम उनियाल, प्रवक्ता (यमुनोत्री मंदिर समिति)
चारधामों में बढ़ रही है मांग
गौरतलब है कि उत्तराखंड के अन्य मुख्य धामों—बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री—में भी इसी तरह की मांग और निर्णय पहले ही चर्चा का विषय बने हुए हैं। यमुनोत्री मंदिर समिति के इस ताजा बयान के बाद अब चारों धामों में सनातन धर्म के अनुयायियों के अलावा अन्य के प्रवेश को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।
