देहरादून। उत्तराखण्ड को नशामुक्त बनाने के संकल्प के साथ सचिवालय सभागार में एक उच्च स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में शैक्षणिक संस्थानों, सिविल सोसायटी और स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) को स्पष्ट संदेश दिया गया कि नशे के विरुद्ध लड़ाई में सामूहिक जिम्मेदारी ही एकमात्र समाधान है।
संस्थानों की जवाबदेही और ‘ज़ीरो टॉलरेंस’
मुख्य सचिव ने दो-टूक शब्दों में कहा कि कोई भी संस्थान अपने यहाँ नशे के आदी छात्र की जानकारी न छुपाए। उन्होंने जोर देकर कहा, “संस्थान की छवि से अधिक महत्वपूर्ण बच्चों का भविष्य है।” यदि कोई छात्र सार्वजनिक स्थल पर नशे या अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो संबंधित संस्थान की जवाबदेही तय की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों को अब केवल शिक्षा तक सीमित न रहकर छात्रों की गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखनी होगी।
प्रमुख निर्देश और कार्ययोजना (Action Plan)
कार्यशाला के दौरान मुख्य सचिव ने नशामुक्ति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निम्नलिखित बिंदुओं पर बल दिया:
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नियमित ट्रैकिंग: हॉस्टल और पीजी में रहने वाले छात्रों, विशेषकर नए प्रवेश लेने वाले युवाओं की नियमित निगरानी की जाए।
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परामर्श और उपचार: नशे के आदी युवाओं को अपराधी मानकर दंडित करने के बजाय, उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं और काउंसलिंग के माध्यम से मुख्यधारा में लाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
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अभिभावकों की भूमिका: संस्थानों को निर्देश दिए गए कि वे अभिभावकों के साथ नियमित संवाद स्थापित करें, क्योंकि अक्सर माता-पिता अपने बच्चों की बाहरी गतिविधियों से अनजान होते हैं।
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ड्रग डिटेक्शन किट: संस्थानों से आग्रह किया गया कि वे ड्रग डिटेक्शन किट के उपयोग और इसके तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्राप्त करें।
सूचना साझा करने के लिए उपलब्ध माध्यम
सरकार ने जनता और संस्थानों से अपील की है कि ड्रग्स से संबंधित किसी भी जानकारी को साझा करने में संकोच न करें। इसके लिए निम्नलिखित विकल्प उपलब्ध हैं:
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टोल-फ्री नंबर: 1933
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संबंधित निकाय: जिला प्रशासन, एसटीएफ (STF) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय।
प्रशासनिक तालमेल और सहभागिता
कार्यशाला में एसटीएफ पुलिस अधीक्षक श्री अजय सिंह ने संस्थानों को पुलिस और एसटीएफ के साथ समन्वय स्थापित करने के व्यावहारिक तरीके बताए। बैठक में पुलिस महानिरीक्षक श्री नीलेश आनंद भरणे, जिलाधिकारी देहरादून श्री सविन बंसल और एसएसपी देहरादून श्री प्रमेंद्र डोबाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और नागरिक समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि ‘नशामुक्त उत्तराखण्ड–नशामुक्त भारत’ का सपना केवल सरकारी फाइलों से नहीं, बल्कि जब शिक्षण संस्थान, अभिभावक और समाज एक साथ खड़े होंगे, तभी साकार होगा।
