उत्तराखंड में ‘सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन’ को रफ्तार: मुख्य सचिव ने दिए पाइपलाइन और CNG स्टेशनों के काम में तेजी लाने के निर्देश

देहरादून: उत्तराखंड राज्य में पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा और सुगम नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कमर कस ली है। हाल ही में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया और बुनियादी ढांचे के निर्माण में आ रही बाधाओं को तुरंत दूर करने के कड़े निर्देश दिए।

जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश: भूमि और अनुमति में न हो देरी

मुख्य सचिव ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि सीएनजी (CNG) स्टेशनों की स्थापना और गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए चिन्हित स्थलों पर आवश्यक भूमि की उपलब्धता प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाए। बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:

  • नोडल अधिकारियों की नियुक्ति: प्रत्येक जनपद में जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) को सीजीडी कंपनियों के साथ समन्वय के लिए ‘नोडल अधिकारी’ नामित किया गया है।

  • त्वरित समाधान: भूमि की आवश्यकता, एनओसी (NOC) और कार्य अवधि से जुड़े लंबित मामलों का निपटारा जनपद स्तर पर बैठक कर शीघ्र करने को कहा गया है।

  • निगरानी तंत्र: परियोजनाओं की प्रगति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए अलग से अधिकारी तैनात किए जाएंगे।

कंपनियों के लिए ‘मानक और समय-सीमा’ का मंत्र

मुख्य सचिव ने केवल सरकारी मशीनरी ही नहीं, बल्कि कार्यदायी कंपनियों को भी जवाबदेह बनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  1. निर्धारित मानक: कंपनियों को तय मानकों और समय-सीमा के भीतर ही कार्य पूरा करना होगा।

  2. जनता की सुविधा: पाइपलाइन बिछाने या निर्माण कार्य के दौरान आम जनता को किसी भी प्रकार की अनावश्यक असुविधा नहीं होनी चाहिए।

  3. बेहतर समन्वय: कंपनियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन के साथ निरंतर संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।


क्यों महत्वपूर्ण है CGD परियोजना?

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विस्तार से न केवल उद्योगों और वाहनों को सस्ता व स्वच्छ ईंधन मिलेगा, बल्कि घरों तक पाइप के जरिए रसोई गैस (PNG) की पहुंच भी आसान होगी। यह उत्तराखंड के पारिस्थितिक तंत्र को सुरक्षित रखने और ‘ग्रीन इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

“किसी भी प्रकार की अनुमति में अनावश्यक विलंब स्वीकार्य नहीं होगा। प्रशासन और कंपनियों को तालमेल बिठाकर इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारना है।” — श्री आनंद बर्द्धन, मुख्य सचिव

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