देहरादून – उत्तराखंड में आगामी अप्रैल माह से शुरू होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को त्रुटिरहित और प्रभावी बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने कमर कस ली है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम की पहल पर राजस्थान के CEO श्री नवीन महाजन ने देहरादून पहुंचकर उत्तराखंड के अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा किए।
राजस्थान के सफल ‘SIR’ मॉडल पर प्रस्तुतीकरण
बैठक के दौरान राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने हाल ही में अपने राज्य में संपन्न हुए एसआईआर (SIR) के संबंध में एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि कैसे तकनीक और बेहतर प्रबंधन के जरिए मतदाता सूचियों को शुद्ध और अपडेट किया जा सकता है। इस सत्र का उद्देश्य राजस्थान की ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ को उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू करना है।
उत्तराखंड की प्रगति: 87% मतदाताओं की मैपिंग पूरी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने प्रदेश की वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि:
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प्रदेश में अब तक 87 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है।
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जिन बूथों पर मैपिंग की गति धीमी है, वहां के अधिकारियों को सख्त टाइमलाइन दी गई है।
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सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि अप्रैल माह से पूर्व मैपिंग और डेटा शुद्धिकरण का कार्य हर हाल में पूरा कर लिया जाए।
प्रशिक्षण और समीक्षा: मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका
बैठक में केवल राज्य स्तर के अधिकारी ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण देने वाले नेशनल (NLMT) और स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर्स (SLMT) ने भी भाग लिया।
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अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे बीएलओ (BLO) स्तर तक गहन प्रशिक्षण सुनिश्चित करें।
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डेटा एंट्री में होने वाली मानवीय भूलों को न्यूनतम करने के लिए तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस उच्चस्तरीय बैठक में निर्वाचन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभाग किया:
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उत्तराखंड से: अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्रा, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी और सीडीओ देहरादून अभिनव शाह।
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राजस्थान से: संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी एम.एम. तिवारी और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी एन.के. मीणा।
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इसके साथ ही सभी जनपदों के डिप्टी डीईओ (Deputy DEO) और अपर जिला अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व प्रत्यक्ष माध्यम से जुड़े रहे।
अप्रैल में होने वाला यह पुनरीक्षण अभियान उत्तराखंड में आने वाले चुनावों के लिए एक मजबूत और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। अन्य राज्यों के सफल मॉडलों को अपनाकर आयोग मतदाता सूची से दोहरे नाम हटाने और नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया को और सरल बना रहा है।
