उत्तराखंड में दो दिवसीय राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल संपन्न: 8 जनपदों में परखी गई आपदा प्रबंधन की तैयारी
देहरादून: उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का दूसरा चरण आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अभ्यास के माध्यम से राज्य के शेष आठ जनपदों—देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, चमोली, चम्पावत, टिहरी, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा—में आपदा प्रबंधन तंत्र की कार्यकुशलता और विभागों के बीच समन्वय का कड़ा परीक्षण किया गया।
विभिन्न आपदा परिदृश्यों पर आधारित अभ्यास
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से इस पूरी कवायद की निरंतर निगरानी की गई। मॉक ड्रिल के दौरान बाढ़, भूस्खलन, भीषण भूकंप, औद्योगिक दुर्घटना, वनाग्नि, सड़क हादसे, मानव-वन्यजीव संघर्ष और भगदड़ जैसे वास्तविक लगने वाले परिदृश्य तैयार किए गए।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि “इन अभ्यासों का उद्देश्य जमीनी स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को जांचना था। सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल दिखा है और जो कमियां सामने आई हैं, उनका विस्तृत विश्लेषण कर उन्हें दूर किया जाएगा।”
जनपदवार प्रमुख गतिविधियां:
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हरिद्वार: हर की पैड़ी और मनसा देवी मार्ग जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में गंगा के जलस्तर में वृद्धि से बाढ़ और भगदड़ की स्थिति पर अभ्यास किया गया। श्रद्धालुओं के रेस्क्यू और भीड़ नियंत्रण का प्रभावी प्रदर्शन हुआ।
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देहरादून: ऋषिकेश और मसूरी जैसे पर्यटन केंद्रों पर चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में विस्फोट, भारी वर्षा और बस दुर्घटना जैसे परिदृश्यों पर SDRF, NDRF और पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया।
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चमोली: संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में टनल धंसाव, एवलांच (हिमस्खलन) और भूकंप से भवन क्षति जैसी गंभीर स्थितियों पर मॉक ड्रिल की गई।
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पिथौरागढ़: धारचूला और दूनाघाट क्षेत्रों में भूस्खलन से सड़क ब्लॉक होने और केमिकल गैस रिसाव जैसी चुनौतीपूर्ण घटनाओं पर राहत-बचाव कार्य का परीक्षण किया गया।
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ऊधमसिंह नगर: यहाँ औद्योगिक इकाइयों में दुर्घटनाओं और नहरों के तटबंध टूटने जैसे परिदृश्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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अल्मोड़ा एवं चम्पावत: रानीखेत और लोहाघाट क्षेत्रों में भूकंप के मलबे में दबे लोगों को निकालने और वनाग्नि की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई की गई।
निष्कर्ष और भविष्य की रणनीति
मॉक ड्रिल के समापन पर अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता पर संतोष व्यक्त किया। सचिव आपदा प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि इन अभ्यासों से प्राप्त डेटा का उपयोग भविष्य की आपदाओं के लिए एक मजबूत ‘रिस्पांस प्लान’ तैयार करने में किया जाएगा। इस सफल आयोजन में स्वास्थ्य विभाग, राजस्व, पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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