प्रधानमंत्री का स्वागत और एशिया के सबसे लंबे वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की सौगात
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखण्ड आगमन पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का हर दौरा राज्य के लिए विकास की नई ऊर्जा लेकर आता है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से ₹12 हजार करोड़ की लागत से बने एशिया के सबसे लंबे ऐलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।
विकास यात्रा और बाबा साहेब को श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने आज के दिन को कई मायनों में ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से उत्तराखण्ड की प्रगति को नई गति मिल रही है, वहीं आज डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती का पावन अवसर भी है। बाबा साहेब को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके द्वारा वंचित वर्गों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों ने ही सामाजिक समरसता को मजबूत किया है। इसके साथ ही उन्होंने वैशाखी और सिख नववर्ष की भी शुभकामनाएं दीं।
2014 के बाद का स्वर्णिम युग और ‘उत्तराखण्ड का दशक’
प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए श्री धामी ने कहा कि 2014 के बाद भारत ने अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस भरोसे को दोहराया जिसमें उन्होंने 21वीं सदी के तीसरे दशक को ‘उत्तराखण्ड का दशक’ बताया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस विजन ने राज्य के प्रत्येक नागरिक के उत्साह को नई उड़ान दी है।
सांस्कृतिक पहचान और ‘वेड इन उत्तराखण्ड’ का विजन
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने उन महत्वपूर्ण फैसलों का जिक्र किया जिनसे उत्तराखण्ड को वैश्विक पहचान मिली। उन्होंने माणा गांव को देश का ‘प्रथम गांव’ घोषित करने, आदि-कैलाश को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने और ‘वेड इन उत्तराखण्ड’ के माध्यम से निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेलों और शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों ने देवभूमि को ‘खेलभूमि’ के रूप में भी स्थापित किया है।
विकल्प रहित संकल्प और ‘नए भारत’ की कविता
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ काम कर रही है। उन्होंने अपने भाषण का अंत एक ओजस्वी कविता से किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे भारत अब रफ़्तार के साथ आगे बढ़ रहा है और आतंकवाद व नक्सलवाद जैसी चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर रहा है। अंत में, उन्होंने प्रधानमंत्री को नंदा राजजात की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
