आर्थिक शक्ति और सुशासन का नया अध्याय: धामी सरकार के 4 वर्षों में ‘विकसित उत्तराखण्ड’ की मज़बूत नींव

देहरादून: उत्तराखण्ड के राजनीतिक और विकास के इतिहास में पिछले चार वर्ष केवल योजनाओं के नहीं, बल्कि ठोस परिणामों और धरातलीय परिवर्तन के गवाह रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत @2047”के विजन को अपना लक्ष्य मानकर एक ऐसी विकास यात्रा शुरू की है, जिसने उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में खड़ा कर दिया है।

आर्थिक मोर्चे पर ऐतिहासिक छलांग: डेढ़ गुना बढ़ा GSDP

मुख्यमंत्री धामी के कुशल वित्तीय प्रबंधन का सबसे बड़ा प्रमाण राज्य के आर्थिक आंकड़े हैं।

  • जीएसडीपी (GSDP): वर्ष 2021-22 की तुलना में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 2024-25 में डेढ़ गुना बढ़कर ₹3.81 लाख करोड़ तक पहुँच गया है।

  • विकास दर और आय: राज्य ने 7.23% की प्रभावशाली विकास दर दर्ज की है। वहीं, आम जनमानस की समृद्धि का संकेत देते हुए प्रति व्यक्ति आय बढ़कर ₹2.73 लाख हो गई है।

  • गरीबी में कमी: मल्टी-डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) में भारी गिरावट आई है, जो अब घटकर मात्र 6.92% रह गया है। यह दर्शाता है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुँच रहा है।

रोजगार और MSME क्रांति

स्वरोजगार को बढ़ावा देने की नीति का ही परिणाम है कि राज्य में MSME इकाइयों की संख्या बढ़कर 80 हजार के पार पहुँच गई है। इन लघु और मध्यम उद्योगों ने न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोले हैं।

स्वास्थ्य सुरक्षा: ‘अटल आयुष्मान’ बना वरदान

पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता रही है। अटल आयुष्मान योजना के तहत अब तक 61 लाख कार्ड बनाए जा चुके हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 17 लाख से अधिक मरीजों को ₹3400 करोड़ से अधिक का मुफ्त इलाज मिला है, जिससे गरीब परिवारों पर बीमारी के आर्थिक बोझ को खत्म किया गया है।

आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: बदलती कनेक्टिविटी की तस्वीर

कनेक्टिविटी को विकास की धुरी मानते हुए धामी सरकार ने बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी सुधार किए हैं:

  • रेल और रोड: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड का कार्य तेज गति से चल रहा है।

  • हवाई सेवाएं: ‘उड़ान’ योजना के तहत हेलीपोर्ट और हेलीपैड की संख्या में वृद्धि की गई है, जिससे आपातकालीन चिकित्सा और पर्यटन दोनों को संजीवनी मिली है।

  • रोपवे: पर्वतीय क्षेत्रों में रोपवे परियोजनाओं के माध्यम से दुर्गम यात्रा को सुगम बनाया जा रहा है।

खेती-किसानी में नवाचार: ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ की धमक

किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ सरकार ने मिलेट्स नीति, कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट योजना जैसे नवाचार शुरू किए हैं। स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए “हाउस ऑफ हिमालयाज” ब्रांड लॉन्च किया गया है, जो उत्तराखंडी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

पर्यटन और आस्था का संगम

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पर्यटन और धार्मिक आस्था के क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बने हैं। चारधाम और कांवड़ यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या ने राज्य के राजस्व और स्थानीय व्यापार को नई गति प्रदान की है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का “समग्र और संतुलित विकास” का संकल्प आज धरातल पर दिख रहा है। कानून व्यवस्था में सुधार, पारदर्शी नीतियां और बुनियादी ढांचे का विस्तार यह सुनिश्चित कर रहा है कि उत्तराखण्ड केवल एक पहाड़ी राज्य नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण में एक “पावरहाउस” की भूमिका निभाएगा।

“हमारा संकल्प केवल विकास नहीं, बल्कि समग्र और संतुलित विकास है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हम उत्तराखण्ड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

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