देहरादून: उत्तराखंड के इतिहास में 27 जनवरी का दिन एक “स्वर्णिम अध्याय” के रूप में दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को गढ़ी कैंट स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस” को संबोधित करते हुए राज्य में यूसीसी (UCC) के सफल क्रियान्वयन की घोषणा की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने न केवल यूसीसी समिति के सदस्यों और प्रशासनिक अधिकारियों को सम्मानित किया, बल्कि इसे “देवकार्य” बताते हुए राज्य की जनता के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
संवैधानिक मूल्यों की पुनर्स्थापना
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यूसीसी का आधार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित है। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान निर्माताओं का यह सपना था कि पूरे देश में नागरिकों के लिए एक समान कानून हो।
यूसीसी लागू होने की महत्वपूर्ण तिथियां:
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7 फरवरी 2024: राज्य विधानसभा में विधेयक पारित।
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11 मार्च 2024: राष्ट्रपति महोदया द्वारा स्वीकृति।
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27 जनवरी 2025: उत्तराखंड में विधिवत रूप से कानून लागू।
महिला सशक्तिकरण और कुरीतियों का अंत
मुख्यमंत्री श्री धामी ने जोर देकर कहा कि यूसीसी किसी धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि “समानता से समरसता” की ओर बढ़ता एक कदम है। इस कानून के आने से उत्तराखंड की महिलाओं, विशेषकर मुस्लिम बहनों को सदियों पुरानी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है:
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कुप्रथाओं पर रोक: हलाला, इद्दत, बहुविवाह और बाल विवाह जैसी प्रथाओं का अंत।
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समान अधिकार: विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के नियमों में सभी धर्मों के लिए एकरूपता।
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सफलता का प्रमाण: कानून लागू होने के बाद से राज्य में बहुविवाह या हलाला का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है।
संपत्ति और उत्तराधिकार: अब सबको मिलेगा हक
संपत्ति के बंटवारे को लेकर यूसीसी ने अत्यंत प्रगतिशील कदम उठाए हैं। अब किसी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसकी संपत्ति पर:
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पत्नी
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बच्चे
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माता-पिता
इन सभी का समान अधिकार होगा। बच्चों के बीच संपत्ति वितरण में किसी भी प्रकार का भेदभाव (लैंगिक आधार पर) समाप्त कर दिया गया है, जिससे पारिवारिक विवादों में कमी आएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप: सुरक्षा और अधिकार
बदलते परिवेश को देखते हुए, युवाओं की सुरक्षा के लिए लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है।
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गोपनीयता: पंजीकरण की सूचना केवल अभिभावकों तक सीमित रहेगी और इसे गोपनीय रखा जाएगा।
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बच्चों के अधिकार: लिव-इन के दौरान जन्म लेने वाले बच्चों को ‘जैविक संतान’ का दर्जा प्राप्त होगा और उन्हें उत्तराधिकार के सभी कानूनी अधिकार मिलेंगे।
“समान नागरिक संहिता किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर सभी नागरिकों में समानता स्थापित करने का एक कानूनी प्रयास है।”
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
डिजिटल गवर्नेंस और पंजीकरण के ऐतिहासिक आंकड़े
मुख्यमंत्री ने बताया कि यूसीसी के माध्यम से सरकारी सेवाओं को जनता के द्वार तक पहुँचाया गया है। पिछले एक वर्ष में आए बदलावों को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:
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विवाह पंजीकरण में उछाल: यूसीसी लागू होने से पहले राज्य में प्रतिदिन औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण होते थे, जो अब बढ़कर 1400 से अधिक हो गए हैं।
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ग्राम पंचायतों की उपलब्धि: राज्य की 30% से अधिक ग्राम पंचायतों में 100% विवाहित दंपतियों का पंजीकरण पूर्ण हो चुका है।
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त्वरित निस्तारण: बीते एक वर्ष में प्राप्त 5 लाख से अधिक आवेदनों में से 95% का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है।
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विस्तृत नेटवर्क: ऑनलाइन पोर्टल और 7,500 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटरों (CSC) के माध्यम से प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है।
यूसीसी में नए संशोधन: धोखाधड़ी और पहचान छिपाने पर प्रहार
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने हाल ही में यूसीसी में कुछ महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी है, जिन्हें राज्यपाल महोदय की स्वीकृति मिल चुकी है:
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पहचान छिपाना अपराध: यदि विवाह के समय कोई अपनी पहचान छिपाता है या गलत तथ्य प्रस्तुत करता है, तो ऐसे विवाह को तत्काल निरस्त करने का प्रावधान किया गया है।
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कठोर दंड: विवाह और लिव-इन संबंधों में किसी भी प्रकार के बल, दबाव, धोखाधड़ी या विधि-विरुद्ध कार्यों के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।
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कुप्रथाओं पर वार: बहु-विवाह और विवाह विच्छेद (तलाक) से संबंधित सामने आ रहे नए मामलों के लिए अलग से प्रावधान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हेट स्पीच के आरोपों पर मुख्यमंत्री का कड़ा रुख
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने एक अमेरिकी एनजीओ द्वारा उन पर लगाए गए ‘हेट स्पीच’ के आरोपों का भी सीधा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“यदि धर्मांतरण और सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ बोलना हेट स्पीच है, तो यह अच्छा ही है। राज्य के हित में ऐसे कदम जारी रहेंगे।”
उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर इस ऐतिहासिक सुधार को लागू किया है। यह कानून न केवल महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि एक सशक्त और एकसमान समाज की नींव भी रखेगा।
