अमृत 2.0: उत्तराखंड के शहरों में सुधरेगा भू-जल स्तर; तालाबों के पुनरुद्धार और ‘रिचार्ज शाफ्ट’ योजनाओं को मिली मंजूरी

देहरादून: उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों में जल संकट के स्थायी समाधान और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित AMRUT 2.0 की हाई पावर कमेटी की बैठक में प्रदेश के विभिन्न शहरों के लिए जल संरक्षण और सौंदर्यीकरण की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।

वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण पर फोकस

बैठक में लघु सिंचाई विभाग द्वारा तैयार किए गए उन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जो सीधे तौर पर गिरते भू-जल स्तर को सुधारने से जुड़े हैं।

प्रमुख स्वीकृत परियोजनाएं:

  • हरिद्वार (बहादराबाद व शिवालिक नगर): बहादराबाद और शिवालिक नगर की रामधाम कॉलोनी व राजलोक कॉलोनी में ‘रिचार्ज शाफ्ट’ की स्थापना की जाएगी। यह तकनीक वर्षा जल को सीधे भू-गर्भ तक पहुँचाने में सहायक होगी।

  • हल्द्वानी व नैनीताल: हरिहर कॉलोनी, विश्वविद्यालय परिसर (हल्द्वानी), उषा रूपक कॉलोनी (नैनीताल) और सुदर्शन कॉलोनी में जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास के साथ-साथ पार्कों के सौंदर्यीकरण कार्य को मंजूरी दी गई।

  • देहरादून: नवादा क्षेत्र में तालाब के नवीनीकरण एवं रिचार्ज शाफ्ट निर्माण तथा डिफेंस कॉलोनी क्षेत्र में जल पुनर्भरण कार्यों को स्वीकृति मिली।

तालाबों का जीर्णोद्धार और शहरी जल प्रबंधन

पर्यावरण संरक्षण और जल निकायों को बचाने के लिए कमेटी ने ‘वॉटर बॉडी’ रेनोवेशन पर भी विशेष ध्यान दिया है:

  • इमलीखेड़ा (हरिद्वार): रांगड़वाला स्थित पुराने तालाब के रेनोवेशन की योजना को मंजूरी दी गई।

  • आधुनिक वॉटर मैनेजमेंट: AMRUT 1.0 के अंतर्गत हुई लगभग ₹39.82 करोड़ की बचत का उपयोग अब रुद्रपुर और काशीपुर में वॉटर मीटर लगाने के लिए किया जाएगा। इससे पानी की बर्बादी रुकेगी और शहरी जल प्रबंधन प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी।

मुख्य सचिव के निर्देश: गुणवत्ता और समयबद्धता

मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन योजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

“इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलेगा और शहरी क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार होगा। संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करें कि सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण हों।” — श्री आनंद बर्द्धन, मुख्य सचिव

‘रिचार्ज शाफ्ट’ तकनीक की महत्ता

शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट के बढ़ते जाल के कारण वर्षा का जल जमीन के अंदर नहीं जा पाता। बैठक में स्वीकृत ‘रिचार्ज शाफ्ट’ तकनीक इस समस्या का वैज्ञानिक समाधान है। यह तकनीक शहरी पार्कों और कॉलोनियों में संचयनित जल को फिल्टर कर सीधे एक्विफर (भू-जल स्रोतों) तक पहुँचाती है, जिससे भविष्य के लिए जल संचय सुनिश्चित होता है।

बैठक में उपस्थिति

इस उच्चस्तरीय बैठक में सचिव श्री नितेश झा, श्री वी. षणमुगम, श्री युगल किशोर पंत सहित शासन और लघु सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

AMRUT 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत ये योजनाएं उत्तराखंड के शहरों को ‘वॉटर सिक्योर’ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी। जल पुनर्भरण के साथ पार्कों के सौंदर्यीकरण से स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।

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