नई दिल्ली: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान में लापरवाही के कारण टाइफाइड (मियादी बुखार) एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन गया है। अक्सर हम इसे एक सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होने वाला यह संक्रमण समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी हो सकता है।
कैसे होती है टाइफाइड की शुरुआत?
टाइफाइड केवल संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की कुछ खराब आदतों से भी फैलता है:
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दूषित खान-पान: हाथ धोए बिना खाना खाना या खुले में रखा बासी भोजन करना।
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अस्वच्छ पानी: अशुद्ध पानी का सेवन शरीर के पाचन तंत्र को कमजोर कर देता है।
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कमजोर पाचन: जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है, तो बैक्टीरिया आसानी से आंतों और रक्त में फैल जाते हैं।
लक्षण जिन्हें पहचानना है जरूरी
यदि आपको निम्नलिखित समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो यह टाइफाइड के संकेत हो सकते हैं:
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तेज बुखार और लगातार कमजोरी।
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पेट में दर्द और भूख न लगना।
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जीभ पर सफेद परत का जमना।
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गंभीर स्थिति में आंतों में अल्सर या आंतरिक रक्तस्राव।
आयुर्वेद का नजरिया: ‘मियादी ज्वर’ का समाधान
आयुर्वेद में टाइफाइड को ‘मियादी ज्वर’ कहा गया है। आयुर्वेद के अनुसार, जब हमारी जठराग्नि (पाचन शक्ति) कमजोर होती है, तब शरीर में रोगाणु पनपते हैं। इसके उपचार के लिए ‘ज्वरनाशन’ और ‘ओज-वर्धन’ (इम्युनिटी बढ़ाना) के सिद्धांतों पर काम किया जाता है।
प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार:
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गिलोय का रस: यह इम्युनिटी बढ़ाने और बुखार को जड़ से खत्म करने में रामबाण है।
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तुलसी और काली मिर्च: इनका काढ़ा बैक्टीरिया को नष्ट करने में बेहद असरदार होता है।
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सुदर्शन चूर्ण: शरीर की ताकत और पाचन तंत्र को सुधारने के लिए इसका सेवन किया जाता है।
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मुलेठी और लौंग का पानी: यह गले और पेट के संक्रमण में राहत देता है।
बचाव के लिए अपनाएं ये जीवनशैली
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही बचाव को इलाज से बेहतर मानते हैं:
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आहार: मूंग दाल की पतली खिचड़ी, छाछ या पका हुआ केला खाएं। यह सुपाच्य भोजन पाचन तंत्र पर दबाव नहीं डालता।
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स्वच्छता: हमेशा हाथ धोकर खाना खाएं और उबला हुआ या साफ पानी ही पिएं।
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ताजा भोजन: हमेशा पका हुआ और ताजा खाना ही खाएं, बासी भोजन से परहेज करें।
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