देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में जंगली जानवरों (सूअर, बंदर आदि) से फसलों को होने वाला नुकसान किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मेहनत रंग लाई है। मुख्यमंत्री की केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से हुई वार्ता के बाद, केंद्र सरकार ने ‘घेर-बाड़ (Fencing) योजना’ के लिए ₹25 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है।
रुकी हुई मदद को फिर से किया बहाल
गौरतलब है कि तीन वर्ष पहले तक ‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ के तहत इस कार्य के लिए केंद्रीय सहायता मिल रही थी, जिसे बाद में तकनीकी कारणों से बंद कर दिया गया था।
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मुख्यमंत्री की पहल: सहायता बंद होने के बावजूद मुख्यमंत्री धामी ने किसानों के हित में जिला योजना से इस कार्य को जारी रखा।
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सफल पैरवी: हाल ही में गौचर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री के समक्ष मजबूती से यह पक्ष रखा, जिसके परिणामस्वरूप अब ₹25 करोड़ का फंड पुनः जारी कर दिया गया है।
अब तक की प्रगति: आंकड़ों की जुबानी
विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन सरकार ने सदन में इस योजना की सफलता का ब्योरा साझा किया:
कैसे काम करेगी घेर-बाड़ योजना?
इस योजना के तहत खेतों के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाया जाता है ताकि जंगली जानवर फसलों को नष्ट न कर सकें। इसमें मुख्यतः तीन प्रकार की तकनीक का प्रयोग किया जाता है:
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चेन लिंक फेंसिंग: खेतों के चारों ओर मजबूत जाली लगाना।
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सोलर फेंसिंग (झटका बाड़): इसमें हल्का करंट प्रवाहित होता है जो जानवरों को डराता है लेकिन उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाता।
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दीवार/बाड़: संवेदनशील क्षेत्रों में पत्थरों या कटीले तारों का सुरक्षा घेरा।
किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
जंगली जानवरों के आतंक के कारण कई किसान खेती छोड़ने पर मजबूर हो रहे थे। अब केंद्र से मिली ₹25 करोड़ की इस भारी-भरकम राशि से प्रदेश के हजारों और किसानों के खेतों को सुरक्षित किया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी खेत जानवरों के भय से ‘बंजर’ न रहे।
धामी सरकार और केंद्र के बीच का यह बेहतर समन्वय उत्तराखंड की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए ‘संजीवनी’ साबित होगा। इससे न केवल पलायन रुकेगा, बल्कि किसानों की आय में भी निश्चित रूप से वृद्धि होगी।
