देहरादून: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज सचिवालय में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए वन विभाग और प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संरक्षण और जन-सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सुरक्षा के लिए ‘थ्री-लेयर’ फेंसिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि गुलदार, बाघ और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में तकनीक और पारंपरिक सुरक्षा का संगम किया जाए:
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आधुनिक निगरानी: संवेदनशील इलाकों में डिजिटल निगरानी और ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (Early Warning System) को सक्रिय किया जाएगा।
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सुरक्षा फेंसिंग: प्रभावित गांवों में सोलर फेंसिंग, बायो-फेंसिंग और हनी बी (मधुमक्खी) फेंसिंग के साथ वॉच टावर स्थापित किए जाएंगे।
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त्वरित कार्रवाई: 32 वन प्रभागों में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर त्वरित कार्रवाई के लिए 93 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) का गठन किया जा चुका है।
कॉरिडोर संरक्षण और एनिमल पास पर जोर
वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए:
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हाथी एवं बाघ कॉरिडोर के संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता दी जाएगी।
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वन्यजीव मार्गों पर एनिमल पास, अंडरपास और ओवरपास के निर्माण को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
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यदि वर्तमान वन्यजीव संरक्षण नियमों में संशोधन की आवश्यकता है, तो विभाग तत्काल प्रस्ताव शासन को भेजें।
कचरा प्रबंधन और हॉट स्पॉट मैपिंग
मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण बिंदु पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन सख्ती से लागू किया जाए। कचरे के कारण ही भालू और अन्य हिंसक जीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं। साथ ही, उन्होंने स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और जल स्रोतों के पास तत्काल सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने और जिलों में ‘हॉट स्पॉट मैपिंग’ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
बड़ी घोषणाएं और निर्णय
बैठक के दौरान कुछ महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय लिए गए:
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अनुग्रह राशि में वृद्धि: वन्यजीव संघर्ष में मानव मृत्यु होने पर दी जाने वाली आर्थिक सहायता को ₹6 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख कर दिया गया है।
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वन भूमि हस्तांतरण: बैठक में वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित 9 प्रस्तावों पर सहमति दी गई।
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नए रेस्क्यू सेंटर: पिथौरागढ़, चम्पावत और रुद्रप्रयाग में नए वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
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उपखनिज चुगान: संरक्षित क्षेत्रों की 10 किमी परिधि में चुगान से जुड़े 22 प्रस्ताव राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को भेजे जाएंगे।
“राज्य के नागरिकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए हम तकनीक, बेहतर पेट्रोलिंग और जन-जागरूकता पर एक साथ काम कर रहे हैं।” — श्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
विकास कार्यों को मिली गति
प्रमुख वन संरक्षक श्री रंजन कुमार मिश्र ने बताया कि ऋषिकेश-नीलकंठ महादेव रोपवे, चौरासी कुटिया पुनर्विकास और लालढांग-चिल्लरखाल वन मोटर मार्ग जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से स्वीकृति मिल चुकी है।
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