सीएम धामी के ‘द्वार’ पर फाग के रंग: मुख्यमंत्री आवास में उमड़ा जनसैलाब, लोक धुनों और विकास के विश्वास संग मना रंगोत्सव

देहरादून: उत्तराखंड की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि राग, ताल और लोक-संस्कृति के मिलन का एक महापर्व है। देवभूमि की इसी गौरवशाली परंपरा का जीवंत स्वरूप आज मुख्यमंत्री आवास में देखने को मिला, जहाँ मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों के साथ होली की खुशियाँ साझा कीं। “अपनत्व और उल्लास” के इस समारोह में मुख्यमंत्री आवास के द्वार आम जनता के लिए खुले रहे, जिससे यह आयोजन एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर एक ‘पारिवारिक मिलन’ में बदल गया।

1. सांस्कृतिक त्रिवेणी: गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी सुरों का संगम

समारोह स्थल उत्तराखंड की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विविधता से सराबोर नजर आया। ढोल-दमाऊं की थाप और हुड़के की गूंज के बीच कलाकारों ने समां बांध दिया।

  • खड़ी और बैठकी होली: कुमाऊं की पारंपरिक बैठकी होली के शास्त्रीय रागों और खड़ी होली के ऊर्जस्वित गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

  • लोक प्रस्तुतियां: गढ़वाली और जौनसारी लोकगीतों पर होल्यारों की टोलियां थिरकती नजर आईं। यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और जड़ों से जुड़ाव की एक गहरी अनुभूति थी।

2. सुशासन और विकास पर ‘जन-विश्वास’ की मुहर

होली मिलन समारोह में उमड़ी विशाल भीड़ केवल त्योहार मनाने नहीं, बल्कि अपने मुख्यमंत्री के प्रति अटूट विश्वास प्रकट करने आई थी। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए ग्रामीणों, युवाओं और मातृशक्ति की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रदेश की जनता को धामी सरकार का ‘सुशासन और विकास मॉडल’ बेहद पसंद आ रहा है।

“जब जनता के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में विश्वास होता है, तो वही सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। आज की यह होली ‘विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को और अधिक गहरा करने का अवसर है।” — श्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

3. ‘जन-जन की सरकार’: वीआईपी कल्चर से दूर आम जन के करीब

मुख्यमंत्री आवास के द्वार आम नागरिकों के लिए खोलना मुख्यमंत्री धामी की उस कार्यशैली को दर्शाता है जहाँ ‘अंतिम छोर का व्यक्ति’ भी शासन के शीर्ष तक सुलभ पहुंच रखता है। लोगों ने मुख्यमंत्री को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं और मुख्यमंत्री ने भी बड़े ही आत्मीय भाव से प्रत्येक व्यक्ति का अभिनंदन किया।

4. एकजुट समाज और समृद्ध संस्कृति का संदेश

यह आयोजन केवल रंगों का खेल नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि उत्तराखंड एक एकजुट समाज के रूप में अपनी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित लोग केवल दर्शक नहीं थे, बल्कि वे उस सांस्कृतिक विरासत के सहभागी बने जो उत्तराखंड को पूरे देश में विशिष्ट पहचान दिलाती है।

विश्वास के रंगों से सजी देवभूमि

मुख्यमंत्री आवास में आयोजित इस भव्य होली मिलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि धामी सरकार के नेतृत्व में उत्तराखंड न केवल आर्थिक और बुनियादी ढांचे में विकास कर रहा है, बल्कि अपनी लोक-परंपराओं के संरक्षण में भी अग्रणी है। ‘धामी के संग चढ़े विश्वास के रंग’ का यह नारा आज धरातल पर चरितार्थ होता दिखा।

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