Dehradun: प्रदेश की सियासत में जमीनी स्तर पर कांग्रेस का आधार कमजोर हो रहा है लेकिन पार्टी में दिग्गज नेताओं में फेस के लिए संग्राम चल रहा है। हर नेता की कोशिश है कि पार्टी का चेहरा बने। इसके लिए अपने क्षत्रपों से एक-दूसरे की घेराबंदी के लिए फिल्डिंग सजाने पर ज्यादा आमदा हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार कांग्रेस कैडर आधारित पार्टी नहीं रही है। यही वजह कि अनुशासनहीनता भी दिखाई देती है।
कांग्रेस में आपसी लड़ाई नई बात नहीं
पार्टी हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डा.हरक सिंह रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सीडब्लूसी सदस्य करन माहरा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। हरीश रावत ने भी इन पांचों नेताओं को पंचमुखी बता चुके हैं। पार्टी में नेतृत्व को लेकर किसी तरह का संशय न रहे, इसके लिए राजनीति संन्यास व चुनाव न लड़ने की बात कहते आए हैं।
राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि भाजपा या वामपंथी दलों की तरह कांग्रेस कैडर आधारित पार्टी नहीं है। जिस कारण अनुशासनहीनता धरातल पर साफ दिखाई देती है। कांग्रेस को इस समय आपसी लड़ाई से ज्यादा धरातल पर काम करने की जरूरत है।
हरीश रावत के मान-मनौव्वल की कवायद शुरू हुई..नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने हरदा से मुलाकात की*
प्रदेश प्रभारी सैलजा से मिलेंगे पूर्व सीएम हरीश रावत
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा के उत्तराखंड दौरे से पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अर्जित अवकाश के बाद उपजे विवाद और अंतरविरोधों को दूर करने के प्रयास तेज हो गए हैं।
इस क्रम में हरदा के मान-मनौव्वल की कवायद शुरू हो गई है। सोमवार को नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने हरदा से मुलाकात की। इस दौरान वर्तमान में उपजी परिस्थितियों को लेकर चर्चा हुई। अब प्रदेश प्रभारी सैलजा के देहरादून आगमन पर हरदा भी उनसे मुलाकात करेंगे।
