चंपावत/देहरादून | 24 फरवरी, 2026
कुमाऊँ अंचल की सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक होली परंपराओं को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत में आयोजित खड़ी होली महोत्सव का वर्चुअली शुभारंभ किया। कलश संगीत कला समिति द्वारा आयोजित इस महोत्सव में मुख्यमंत्री ने चंपावत की पावन धरा के लोगों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और समृद्ध लोक विरासत को जीवित रखने के लिए बधाई दी।
‘खड़ी और बैठकी होली’: केवल पर्व नहीं, सामाजिक समरसता की अभिव्यक्ति
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कुमाऊँनी होली की विशिष्टता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यहाँ की खड़ी होली और बैठकी होली केवल एक त्यौहार नहीं है, बल्कि यह हमारे पारंपरिक लोक संगीत, राग-रागिनियों और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है।
“पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा हमारी लोक आस्था और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाती है। होली के पारंपरिक गीतों और वाद्ययंत्रों की थाप हमें अपनी जड़ों की याद दिलाती है।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का माध्यम
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे महोत्सव युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। आज के आधुनिक दौर में जब युवा अपनी संस्कृति से दूर हो रहे हैं, तब ऐसे आयोजन उन्हें पूर्वजों की विरासत, लोकभाषा और सामूहिक सहभागिता के महत्व से परिचित कराते हैं। सामूहिक गायन और पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार समाज में सौहार्द और एकता का संचार करते हैं।
कलाकारों और लोककला को मिल रहा नया मंच
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोककला, लोकभाषा और लोकसंस्कृति का संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
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सांस्कृतिक प्रोत्साहन: सरकार मेलों और महोत्सवों के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रही है।
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नई पहचान: पारंपरिक वाद्ययंत्रों (ढोल-दमोह, हुड़का) और गायन शैलियों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कलश संगीत कला समिति की सराहना
मुख्यमंत्री ने महोत्सव के आयोजक कलश संगीत कला समिति के प्रयासों की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा इस प्रकार के आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि को संरक्षित रखने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रबुद्ध नागरिक और सांस्कृतिक प्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने कुमाऊँनी होली के पारंपरिक गीतों का आनंद लिया।
