देहरादून, 26 जनवरी: उत्तराखंड के सूचना विभाग ने एक बार फिर अपनी रचनात्मकता और राज्य की सांस्कृतिक झलक को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत कर इतिहास रच दिया है। गणतंत्र दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में सूचना विभाग की झांकी को लगातार तीसरी बार प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इस वर्ष की झांकी का विषय ‘‘उत्तराखण्ड रजत जयंती और शीतकालीन धार्मिक यात्रा व पर्यटन’’ रखा गया था।
झांकी की मुख्य विशेषताएं: विकास और परंपरा का संगम
सूचना विभाग की इस झांकी को कई महत्वपूर्ण खंडों में विभाजित किया गया था, जो राज्य के 25 वर्षों के सफर और भविष्य के विजन को दर्शाते हैं:
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अग्रिम भाग (State’s Journey): झांकी के केबिन में उत्तराखंड गठन के 25 गौरवशाली वर्षों को प्रदर्शित किया गया। यह राज्य की निरंतर प्रगति और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रहा।
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शीतकालीन धाम: झांकी के अग्र भाग में माँ गंगा के शीतकालीन प्रवास ‘गंगा मन्दिर, मुखवा’ और मध्य भाग में माँ यमुना के शीतकालीन धाम ‘खरसाली’ को जीवंत रूप में दिखाया गया। यह राज्य में ‘विंटर टूरिज्म’ को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों को रेखांकित करता है।
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आयुर्वेद और होम स्टे: ट्रेलर भाग में उत्तराखंड को आयुर्वेद के अग्रणी राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। साथ ही, ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती देने वाली ‘होम स्टे योजना’ का भी मनमोहक प्रदर्शन किया गया।
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प्रगति के स्तंभ: झांकी के अंतिम हिस्से में उठते हुए पिलर्स (स्तंभ) दिखाए गए, जो उत्तराखंड की साल-दर-साल होती प्रगति और सतत विकास (Sustainable Development) को दर्शाते हैं।
सुशासन और लोक कला का तड़का
झांकी के पिछले हिस्से में राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए नए कानूनों (जैसे UCC) को प्रदर्शित किया गया, जो पारदर्शी शासन और सुशासन के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दिखाता है। पूरी झांकी को उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला से सजाया गया था, जो आधुनिकता के साथ लोक विरासत के जुड़ाव को व्यक्त करती है।
झांकी का संदेश
सूचना विभाग की इस झांकी ने न केवल दर्शकों का मन मोहा, बल्कि यह संदेश भी दिया कि उत्तराखंड अपनी जड़ों (आयुर्वेद और संस्कृति) से जुड़े रहकर आधुनिक विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सूचना विभाग की टीम को इस शानदार उपलब्धि के लिए सम्मानित किया।
