देहरादून: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में हरिद्वार शहर की यातायात व्यवस्था को आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। आज सचिवालय में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में परियोजना की लागत, भूमि हस्तांतरण और वित्तीय मॉडल जैसे तकनीकी पहलुओं पर गहन मंथन किया गया।
पीपीपी मॉडल और निर्माण लागत
उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक श्री बृजेश कुमार मिश्रा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का क्रियान्वयन पीपीपी (Public-Private Partnership) मोड के तहत DBFOT (डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) आधार पर किया जाना प्रस्तावित है। अधिकारियों के अनुसार, रोपवे संरचना के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 75 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर आंकी गई है। इसमें स्टेशन निर्माण, कार्यशाला और भूमि की लागत अलग से शामिल होगी। यह परियोजना न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि चारधाम यात्रा और पर्यटन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगी।
भूमि हस्तांतरण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से समन्वय
परियोजना के मार्ग में आने वाली भूमि के हस्तांतरण को लेकर सचिव आवास ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित रोपवे स्टेशन के लिए आवश्यक भूमि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के स्वामित्व में है। इसके लिए उन्होंने निर्देश दिए कि उत्तराखण्ड सिंचाई विभाग के माध्यम से उत्तर प्रदेश शासन को पुनः अनुस्मारक पत्र भेजा जाए। सरकार का लक्ष्य है कि इस भूमि को ₹1 प्रति वर्ष की दर से 99 वर्षों की लीज पर उत्तराखण्ड आवास विभाग को हस्तांतरित कराया जाए, ताकि परियोजना का कार्य निर्बाध रूप से शुरू हो सके।
कन्सेशन अवधि में विस्तार का सुझाव
परियोजना की उच्च निर्माण लागत और वित्तीय व्यवहार्यता (Financial Viability) को देखते हुए सचिव आवास ने निविदा प्रक्रिया में लचीलापन लाने के निर्देश दिए। वर्तमान में प्रस्तावित 30 वर्ष की कन्सेशन अवधि के स्थान पर उन्होंने सुझाव दिया कि इसे अतिरिक्त 30 वर्ष (15-15 वर्ष के दो चरण) तक बढ़ाने का विकल्प रखा जाए। इससे न केवल निजी निवेशकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि परियोजना की वित्तीय स्थिरता भी सुनिश्चित हो सकेगी।
समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश
बैठक के अंत में डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस परियोजना को डीपीआर (DPR) स्तर पर अनुमोदित करते हुए तत्काल ईएफसी (EFC) स्तर पर प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया ताकि तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताओं को समय पर पूरा कर परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जा सके। इस एकीकृत रोपवे के शुरू होने से हरिद्वार में जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
