देहरादून: उत्तराखंड में ‘हर घर जल’ के संकल्प को पूर्ण पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ धरातल पर उतारने के लिए शासन ने कमर कस ली है। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित जल जीवन मिशन की सर्वोच्च समिति की बैठक में मिशन की प्रगति, वित्तीय स्थिति और आगामी कार्ययोजना की गहन समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि रिपोर्टिंग और वास्तविक धरातलीय स्थिति में कोई अंतर नहीं होना चाहिए।
1. पानी की शुद्धता और सार्वजनिक पारदर्शिता
मुख्य सचिव ने ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति किए जा रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि केवल पानी पहुँचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सुरक्षित होना अनिवार्य है।
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अनिवार्य परीक्षण: अब हर पेयजल योजना के पानी का रासायनिक (Chemical) और बैक्टीरियोलॉजिकल (Bacteriological)परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
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सार्वजनिक सूचना: आम जनता के विश्वास के लिए, परीक्षण के परिणाम और तिथि को संबंधित प्रोजेक्ट साइट पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
2. ‘हर घर जल’ का शत-प्रतिशत प्रमाणन (Certification)
बैठक में ‘फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन’ (FHTC) की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पर जोर दिया।
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सर्टिफिकेशन अनिवार्य: जिन गाँवों में पाइप से जल संयोजन का कार्य पूर्ण दिखाया गया है, वहाँ ग्राम पंचायतों के माध्यम से शत-प्रतिशत सर्टिफिकेशन सुनिश्चित किया जाए।
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डेटा शुद्धता: उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि कागजी आंकड़ों और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच किसी भी प्रकार का अंतर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
3. आधुनिक तकनीक और डिजिटल मॉनिटरिंग
मिशन की निगरानी को वैज्ञानिक आधार देने के लिए तकनीकी टूल्स के उपयोग की समीक्षा की गई:
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GIS Mapping: पाइपलाइन नेटवर्क की सटीक स्थिति जानने के लिए जीआईएस मैपिंग को अनिवार्य किया गया है।
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PM गतिशक्ति पोर्टल: पाइपलाइन के पूरे नेटवर्क को पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए ताकि भविष्य के विकास कार्यों में समन्वय बना रहे।
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सुजल गाँव आईडी: प्रत्येक गाँव की विशिष्ट पहचान के लिए सुजल आईडी निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा गया।
4. आगामी कार्ययोजना और जवाबदेही
बैठक में वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना और सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) पर भी चर्चा हुई।
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थर्ड पार्टी निरीक्षण: कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए तृतीय-पक्ष निरीक्षण (Third-party Inspection) को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।
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समयबद्ध रिपोर्टिंग: केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले सभी बिंदुओं पर समयबद्ध रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा गया।
बैठक में उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में सचिव श्री दिलीप जावलकर, श्री रणवीर सिंह, हॉफ (HoFF) श्री रंजन मिश्र, अपर सचिव श्री रोहित मीणा और श्रीमती अपूर्वा पांडेय उपस्थित रहे। भारत सरकार के राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के निदेशक श्री प्रदीप सिंह भी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े और तकनीकी सुझाव साझा किए।
मुख्य सचिव के इन निर्देशों से उत्तराखंड में जल जीवन मिशन को नई गति और पारदर्शिता मिलेगी। पानी की जांच और सार्वजनिक बोर्डों पर उसकी जानकारी अंकित होने से ग्रामीण उपभोक्ताओं में व्यवस्था के प्रति भरोसा और अधिक सुदृढ़ होगा।
