देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘8वें ज्योतिष महाकुम्भ’ में शिरकत की। अमर उजाला द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने भारतीय प्राचीन विधाओं के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला और देश-विदेश से आए प्रख्यात ज्योतिष आचार्यों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम गौड़ को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से नवाजा। साथ ही, ज्योतिष के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले अन्य विद्वानों को भी सम्मानित किया गया।
सनातन संस्कृति: ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का संगम
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति केवल परंपराओं का पुलिंदा नहीं है, बल्कि यह गहरे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोध का परिणाम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्योतिष शास्त्र ब्रह्मांडीय ऊर्जा और मानव जीवन के बीच के संतुलन को समझने का एक समृद्ध माध्यम है।
“हमारे ऋषि-मुनि केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं थे, वे उच्च कोटि के वैज्ञानिक थे। आज आधुनिक विज्ञान जिन खगोलीय घटनाओं को समझने के लिए विशाल यंत्रों का उपयोग करता है, हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व अपनी गणनाओं से उन्हें सिद्ध कर दिया था।” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
भारतीय ऋषियों का वैज्ञानिक योगदान
मुख्यमंत्री ने प्राचीन भारतीय विद्वानों के योगदान को याद करते हुए कहा:
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आर्यभट्ट: इन्होंने खगोल विज्ञान और गणित में क्रांतिकारी सिद्धांत दिए।
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महर्षि पराशर: ज्योतिष शास्त्र को एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया।
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वराहमिहिर: खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया।
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भृगु मुनि: कालगणना और भविष्य कथन की परंपरा को समृद्ध किया।
उन्होंने उल्लेख किया कि अब नासा (NASA) जैसी वैश्विक संस्थाएं भी यह मानने लगी हैं कि भारतीय ज्योतिष और खगोल विज्ञान के माध्यम से जटिल भौगोलिक घटनाओं को समझा जा सकता है।
उत्तराखंड बनेगा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विकसित कर रही है। इसके लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
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सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज: दून विश्वविद्यालय में भारतीय दर्शन और इतिहास के गहन अध्ययन के लिए इसकी स्थापना की गई है।
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स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन: गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक जोन बनाया जाएगा, जो योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा।
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आयुष और वेलनेस: राज्य में आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास जारी हैं।
समाज के प्रति जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने ज्योतिष आचार्यों से आह्वान किया कि वे इस पवित्र ज्ञान को पूरी जिम्मेदारी के साथ समाज के सामने रखें। उन्होंने कहा कि ज्योतिष शास्त्र का निष्कर्ष मानव जीवन की समस्याओं के निराकरण और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए सार्थक मार्गदर्शन प्रदान करने वाला होना चाहिए।
गरिमामयी उपस्थिति: कार्यक्रम में स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, ग्राफिक एरा ग्रुप के अध्यक्ष श्री कमल घनसाला, अमर उजाला के संपादक श्री अनूप वाजपेयी सहित देश के कई दिग्गज ज्योतिषाचार्य उपस्थित रहे।
8वां ज्योतिष महाकुम्भ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की उस गौरवशाली विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, जिसने कभी दुनिया को ‘जगद्गुरु’ के रूप में दिशा दिखाई थी। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड अब आधुनिक विकास के साथ-साथ अपनी प्राचीन विद्याओं के संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
