रुड़की/देहरादून | 16 जनवरी, 2026
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज रुड़की स्थित कोर यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप’ का वर्चुअली शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दिव्यांग खिलाड़ियों के जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि भारत की अदम्य इच्छाशक्ति का उत्सव है।
हौसलों की उड़ान: बाधाओं को चुनौती में बदलते खिलाड़ी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पावरलिफ्टिंग अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास का खेल है। उन्होंने देश के दिग्गज पैरा-खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए युवाओं को प्रेरित किया:
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मुरलीकांत पेटकर: भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता (1972)।
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शीतल देवी: बिना हाथों के विश्व पैरा तीरंदाजी में स्वर्ण जीतकर दुनिया को हैरान करने वाली खिलाड़ी।
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सत्येंद्र सिंह लोहिया: 12 घंटे में इंग्लिश चैनल पार करने वाले पहले भारतीय दिव्यांग तैराक।
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महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम: कोलंबो में टी-20 वर्ल्ड कप-2025 जीतकर देश का मान बढ़ाने वाली टीम।
“हमारे दिव्यांग भाई-बहन आज साबित कर रहे हैं कि अगर हौसला बुलंद हो, तो शरीर की कोई भी अक्षमता सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
खेलों का ‘स्वर्णिम अध्याय’ और प्रधानमंत्री का विजन
मुख्यमंत्री ने पिछले एक दशक को भारतीय खेलों का स्वर्णिम काल बताया। उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों को दिया:
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बजट में बढ़ोत्तरी: प्रधानमंत्री के नेतृत्व में खेल बजट पहले के मुकाबले तीन गुना बढ़ चुका है।
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खेलो इंडिया: इस मुहिम ने देश के कोने-कोने से प्रतिभाओं को खोजकर विश्व स्तरीय मंच प्रदान किया है।
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नया भारत: सीएम ने कहा कि आज का भारत केवल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए नहीं, बल्कि पदक जीतने के संकल्प के साथ मैदान में उतरता है।
उत्तराखंड: ‘देवभूमि’ के साथ अब ‘खेलभूमि’ भी
राज्य की उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों की सफलता ने उत्तराखंड को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित किया है।
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पदक तालिका: उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर देश में 7वां स्थान प्राप्त किया।
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इंफ्रास्ट्रक्चर: राज्य सरकार प्रदेश में विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है, जिससे अब उत्तराखंड अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए भी पूरी तरह सक्षम है।
समारोह में दिग्गजों की मौजूदगी
कार्यक्रम में पद्मश्री और खेल रत्न विजेता डॉ. दीपा मलिक (पहली महिला पैरालंपिक पदक विजेता) विशेष रूप से उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने उनके सफर को प्रेरणा का स्रोत बताया। साथ ही, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के महासचिव जयवंत हम्मुनावा, इंडिया पैरा पावरलिफ्टिंग के चेयरपर्सन जेपी सिंह और कोर यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जेसी जैन सहित कई गणमान्य व्यक्ति और पैरालंपिक खिलाड़ी उपस्थित रहे।
रुड़की में आयोजित यह चैंपियनशिप न केवल खिलाड़ियों को अपनी ताकत दिखाने का मंच प्रदान करेगी, बल्कि यह समाज में दिव्यांगजनों के प्रति दृष्टिकोण बदलने में भी मील का पत्थर साबित होगी।
