Dehradun: उत्तराखंड के इतिहास में आगामी 27 जनवरी की तारीख एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रही है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू हुए एक वर्ष पूरा होने वाला है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू किया गया यह कानून न केवल महिला सशक्तिकरण और बाल अधिकारों की सुरक्षा का स्तंभ बना है, बल्कि इसने सरकारी प्रक्रियाओं को जनता के लिए बेहद सरल और पारदर्शी भी बना दिया है।
डिजिटल क्रांति: अब विवाह पंजीकरण हुआ और भी आसान
UCC लागू होने का सबसे बड़ा और सकारात्मक प्रभाव प्रक्रियाओं के सरलीकरण के रूप में सामने आया है। पहले जहाँ ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत विवाह पंजीकरण एक जटिल और ऑफलाइन प्रक्रिया थी, वहीं अब UCC ने इसे पूरी तरह डिजिटल कर दिया है।
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कहीं से भी पंजीकरण: अब पति-पत्नी और गवाहों को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है।
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ऑनलाइन वीडियो सत्यापन: दंपत्ति अपने रिकॉर्ड और वीडियो बयान कहीं से भी ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।
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पारदर्शिता: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और पारदर्शिता बढ़ी है।
आंकड़ों में बड़ी सफलता: 20 गुना बढ़ी पंजीकरण की रफ्तार
UCC के प्रति जनता का विश्वास आंकड़ों में साफ झलकता है। 19 जनवरी 2026 की दोपहर तक के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी बयां करते हैं:
मुख्यमंत्री का विजन: देश के लिए ‘मॉडल कानून’
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने UCC लागू कर देश के अन्य राज्यों को एक नई दिशा दिखाई है। उन्होंने जोर दिया कि:
“बीते एक साल में हमने जिस पारदर्शिता और सरलता से UCC के प्रावधानों को धरातल पर उतारा है, उससे जनता का विश्वास बढ़ा है। उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता हर मायने में एक ‘मॉडल कानून’ साबित हुई है।”
सशक्त होता उत्तराखंड
UCC केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक समानता की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम है। विवाह पंजीकरण में आया यह क्रांतिकारी बदलाव दर्शाता है कि कैसे आधुनिक तकनीक और सही नीति मिलकर आम नागरिक के जीवन को सुगम बना सकती हैं। महिला सशक्तिकरण और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में उत्तराखंड का यह ‘मॉडल’ आज पूरे देश में चर्चा का विषय है।
