उत्तराखंड में बारानी खेती को मिलेगा नया जीवन: ₹187.11 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना मंजूर, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से लड़ेंगे किसान

देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा आधारित (बारानी) खेती को आधुनिक, टिकाऊ और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित ‘उत्तराखण्ड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना’ (UCRRFP) की हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹187.11 करोड़ की भारी-भरकम वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी प्रदान की गई।

वित्तीय रोडमैप: ₹187 करोड़ का निवेश

बैठक में परियोजना की भौतिक और वित्तीय प्रगति की सूक्ष्म समीक्षा की गई। कमेटी ने भविष्य के लक्ष्यों के साथ-साथ पिछले बजट का भी व्यवस्थित आंकलन किया:

  • वार्षिक कार्ययोजना (2026-27): ₹187.11 करोड़ का अनुमोदन।

  • पुनरीक्षित बजट (2025-26): ₹62.19 करोड़ की संशोधित कार्ययोजना को भी स्वीकृति दी गई।

  • प्रचालन मैनुअल: परियोजना के सुचारू संचालन के लिए ‘प्रोजेक्ट ऑपरेशंस मैनुअल’ और ‘फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम मैनुअल’ को भी हरी झंडी दिखाई गई।

मुख्य सचिव के निर्देश: ‘स्थानीय आवश्यकता, स्थानीय समाधान’

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस परियोजना का केंद्र बिंदु ‘गाँव और किसान’ होना चाहिए।

“जलवायु परिवर्तन आज की सबसे बड़ी चुनौती है। हमें बारानी कृषि को इतना सक्षम बनाना होगा कि वह मौसम की अनिश्चितताओं को झेल सके। अधिकारियों को चाहिए कि वे ग्राम स्तर पर जाकर स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं तैयार करें ताकि अंतिम छोर पर बैठे ग्रामीण को इसका सीधा लाभ मिले।”श्री आनन्द बर्द्धन, मुख्य सचिव

 क्या है UCRRFP परियोजना का उद्देश्य?

उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा सिंचाई सुविधाओं के अभाव में वर्षा पर निर्भर है। इस परियोजना के माध्यम से निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है:

  1. मृदा स्वास्थ्य: मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक तकनीकें अपनाना।

  2. जल संचयन: वर्षा जल को सहेजने के लिए छोटे जलाशयों और ट्रेंच का निर्माण।

  3. फसल विविधीकरण: ऐसी फसलों को बढ़ावा देना जिन्हें कम पानी की आवश्यकता हो और जो बाजार में उच्च मूल्य दिला सकें।

  4. तकनीकी सशक्तिकरण: किसानों को मौसम के पूर्वानुमान और आधुनिक कृषि यंत्रों से जोड़ना।

प्रशासनिक अमले की उपस्थिति

इस उच्चस्तरीय बैठक में शासन और परियोजना से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  • श्री दिलीप जावलकर: सचिव एवं मुख्य परियोजना निदेशक

  • श्री सी. रविशंकर: सचिव

  • श्री हिमांशु खुराना: परियोजना निदेशक

  • श्रीमती अपूर्वा पांडेय: अपर सचिव

  • कहकशां नसीम: अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (SARRA)

इसके अलावा संयुक्त निदेशक डॉ. ए.के. डिमरी, मुख्य वित्त अधिकारी दीपक भट्ट और अन्य विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।

₹187 करोड़ की यह कार्ययोजना उत्तराखंड के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है। ‘जलवायु अनुकूल’ तकनीकों के समावेश से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि पलायन रोकने में भी यह परियोजना मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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