नदियों और नौलों को मिलेगा नया जीवन: मुख्य सचिव ने सोंग और कमल नदी के पुनर्जीवन हेतु DPR तैयार करने के दिए निर्देश

देहरादून: उत्तराखंड की जीवनदायिनी नदियों और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में धामी सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (SARRA) की हाई-पावर्ड कमेटी की बैठक में विश्व बैंक पोषित जलागम विकास और जल निकायों के पुनर्जीवन की परियोजनाओं की गहन समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य फोकस देहरादून की सोंग नदी और उत्तरकाशी की कमल नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारने पर रहा।

सोंग और कमल नदी का होगा वैज्ञानिक कायाकल्प

मुख्य सचिव ने सोंग नदी के उन क्षेत्रों के विस्तृत चिन्हीकरण (Identification) के निर्देश दिए हैं, जहाँ मानवीय हस्तक्षेप या पर्यावरणीय कारणों से सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

  • DPR निर्माण: चिन्हित क्षेत्रों की आवश्यकताओं के आधार पर संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR)तैयार करने को कहा गया है।

  • वैज्ञानिक मूल्यांकन: परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उनके वास्तविक प्रभाव को मापने के लिए IIT रुड़की जैसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के सहयोग से वैज्ञानिक ऑडिट कराने पर विचार करने के निर्देश दिए गए।

 पारंपरिक नौलों-धारों का संरक्षण: विरासत और विज्ञान का मेल

उत्तराखंड की पहचान यहाँ के पारंपरिक जल स्रोत—नौले और धारे—हैं। मुख्य सचिव ने इनके संरक्षण के लिए एक स्पष्ट कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया:

  • नैसर्गिक संरचना की सुरक्षा: सभी जनपदों को निर्देश दिए गए हैं कि नौलों-धारों के उपचार के दौरान उनकी प्राकृतिक बनावट से कोई छेड़छाड़ न की जाए।

  • वैज्ञानिक उपचार: पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़कर जल स्रोतों को रिचार्ज किया जाए, ताकि पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

‘कैम्पा’ (CAMPA) के साथ कन्वर्जेंस और वनीकरण

जल संरक्षण के कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्य सचिव ने अंतर-विभागीय समन्वय (Convergence) पर बल दिया।

  • वन क्षेत्रों में कार्य: वन क्षेत्रों में जल संरक्षण और वॉटर रिचार्ज से संबंधित कार्यों को कैम्पा (CAMPA) निधि के माध्यम से संयोजित करने के निर्देश दिए गए।

  • वृक्षारोपण: नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment areas) में सघन वनीकरण करने को कहा गया है, जिससे वर्षा जल को रोकने और भू-जल स्तर बढ़ाने में मदद मिल सके।

 नियमित निगरानी और समयबद्धता

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि ‘सारा’ (SARRA) की बैठकें नियमित अंतराल पर आयोजित की जाएं ताकि कार्यों की गति बनी रहे। उन्होंने अप्रैल 2025 में हुई पिछली बैठक के निर्देशों के अनुपालन की भी समीक्षा की और लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने की हिदायत दी।


बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में सचिव श्री दिलीप जावलकर, श्री सी. रविशंकर, अपर सचिव श्री हिमांशु खुराना, श्रीमती अपूर्वा पांडेय और ‘सारा’ की अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी कहकशां नसीम सहित संबंधित विभागों के आला अधिकारी मौजूद रहे।

‘सारा’ की यह पहल उत्तराखंड के गिरते भू-जल स्तर को रोकने और विलुप्त होती नदियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आईआईटी रुड़की जैसे संस्थानों की भागीदारी और कैम्पा के साथ समन्वय से इन परियोजनाओं में तकनीकी सटीकता और वित्तीय सुदृढ़ता सुनिश्चित होगी।

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