Dehradun: उत्तराखंड की देवभूमि अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि सुशासन और पारदर्शिता के लिए भी एक मिसाल बन रही है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो जंग छेड़ी थी, उसे अब पर्दे के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है। हाल ही में रिलीज हुई शॉर्ट फिल्म ‘आखिरी कोशिश’ इसी ऐतिहासिक बदलाव का जीवंत दस्तावेज है।
देश का सबसे सख्त कानून और धामी सरकार का संकल्प
उत्तराखंड सरकार द्वारा लागू किया गया ‘नकल विरोधी कानून’ आज पूरे देश के लिए एक नजीर बन चुका है। इस फिल्म के माध्यम से यह दिखाया गया है कि कैसे वर्षों से सक्रिय नकल माफिया ने प्रदेश के होनहार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया था। मुख्यमंत्री धामी के दूरदर्शी निर्णय ने न केवल इन माफियाओं की कमर तोड़ी, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जहां केवल योग्यता और मेहनत का ही बोलबाला हो।
‘आखिरी कोशिश’: ईमानदारी की जीत का संदेश
यह फिल्म मात्र मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि न्याय आधारित व्यवस्था का प्रतीक है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
-
पारदर्शिता की मिसाल: फिल्म दर्शाती है कि कैसे कड़े कानून के कारण 28,000 से अधिक युवाओं को बिना किसी भेदभाव के सरकारी नौकरी मिली।
-
युवाओं का आत्मविश्वास: भ्रष्टाचार मुक्त परीक्षा प्रणाली ने युवाओं में यह विश्वास जगाया है कि उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी।
-
सामाजिक प्रेरणा: यह फिल्म समाज को संदेश देती है कि शॉर्टकट के बजाय ईमानदारी का रास्ता ही स्थायी सफलता दिलाता है।
“हमारा संकल्प है कि युवाओं के भविष्य के साथ कोई अन्याय न हो। यह कानून उत्तराखंड में सुशासन और पारदर्शिता की एक मजबूत नींव है।” — श्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
मेहनत की जीत, नकल की हार
‘आखिरी कोशिश’ उत्तराखंड की उस नई पहचान को रेखांकित करती है, जहाँ व्यवस्था पारदर्शी है और चयन की प्रक्रिया निष्पक्ष। यह फिल्म हर उस छात्र के लिए प्रेरणास्रोत है जो दिन-रात अपने सपनों के लिए संघर्ष कर रहा है।
मुख्यमंत्री का यह साहसिक कदम यह सुनिश्चित करता है कि राज्य के संसाधनों और पदों पर केवल उन युवाओं का हक हो, जिन्होंने अपनी काबिलियत से उसे हासिल किया है।
