देहरादून: मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आज ‘संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देवभूमि की पहचान यहाँ के पर्वतों और मंदिरों के साथ-साथ ‘देववाणी संस्कृत’ से भी है।
शिक्षा और नवाचार का डिजिटल संगम
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान संस्कृत को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए:
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वर्चुअल शुभारंभ: ‘प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केन्द्र’ एवं ‘ई-संस्कृत संभाषण शिविर’ की शुरुआत की गई।
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साहित्यिक विमोचन: उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के त्रैमासिक पत्र ‘संस्कृत वार्ता’ का विमोचन किया गया।
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छात्रवृत्ति वितरण: मेधावी छात्राओं को ‘गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति’ तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के विद्यार्थियों को ‘डॉ. भीमराव आंबेडकर छात्रवृत्ति’ प्रदान की गई।
संस्कृत की वैज्ञानिकता और आधुनिक संदर्भ
मुख्यमंत्री ने संस्कृत को विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा बताते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पाणिनी की अष्टाध्यायी आज भी आधुनिक भाषाविदों के लिए शोध का विषय है।
संबोधन के मुख्य अंश:
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ज्ञान की जड़ें: आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, गणित और दर्शनशास्त्र जैसे विषयों का मूल आधार संस्कृत ही है।
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डिजिटल इंडिया और संस्कृत: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत संस्कृत को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा रहा है।
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वैश्विक पहचान: विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में संस्कृत की वैज्ञानिकता पर हो रहे शोध इसकी प्रासंगिकता को सिद्ध करते हैं।
उत्तराखण्ड: संस्कृत संरक्षण का मॉडल
उत्तराखण्ड देश का अग्रणी राज्य है जहाँ संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया:
सरकार की प्रतिबद्धता
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं और संस्कृत विश्वविद्यालयों में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
इस अवसर पर विधायक श्रीमती सविता कपूर, श्री खजान दास, सचिव संस्कृत शिक्षा श्री दीपक कुमार सहित शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विद्वान उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अंत में आह्वान किया कि संस्कृत को केवल पूजा-पाठ की भाषा न मानकर, इसे विज्ञान और आधुनिकता की भाषा के रूप में अपनाना होगा।
