देहरादून/चम्पावत: उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा की। मुख्यमंत्री ने अपने शासकीय आवास से वर्चुअल माध्यम से जनपद चम्पावत के प्रसिद्ध श्री वाराही धाम देवीधुरा में आयोजित मंदिर के नवनिर्माण कार्य का शिलान्यास किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार देवभूमि को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
श्रद्धा और वीरता का केंद्र: मां वाराही धाम
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि मां वाराही का यह प्राचीन धाम सदियों से करोड़ों लोगों की आस्था और शक्ति का केंद्र रहा है। उन्होंने देवीधुरा में आयोजित होने वाले सुप्रसिद्ध ‘बग्वाल मेले’ का उल्लेख करते हुए इसे वीरता, परंपरा और सामूहिक आस्था का अद्भुत संगम बताया। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने इस ऐतिहासिक मेले के महत्व को देखते हुए इसे पहले ही ‘राजकीय मेला’ घोषित कर दिया है।
भव्य स्वरूप और विकास का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नवनिर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद मंदिर को और अधिक भव्य और आकर्षक स्वरूप मिलेगा। उन्होंने कहा:
“यह धाम केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और समृद्धि का भी प्रतीक बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम विकास के साथ-साथ अपनी सनातन परंपरा और सांस्कृतिक पहचान के जीवंत प्रतीकों (शक्तिपीठों और सिद्धपीठों) के संरक्षण का कार्य कर रहे हैं।”
चम्पावत में बुनियादी ढांचे और पर्यटन का कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने चम्पावत क्षेत्र में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं का विवरण भी साझा किया, जो क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी:
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शारदा कॉरिडोर: क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शारदा कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है।
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शारदा घाट पुनर्विकास: ₹179 करोड़ की लागत से शारदा घाट के पुनर्विकास कार्य का शिलान्यास किया गया है।
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गोल्ज्यू कॉरिडोर: लगभग ₹430 करोड़ की लागत से गोल्ज्यू कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
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मानसखंड मंदिर माला मिशन: केदारखंड (गढ़वाल) की तर्ज पर कुमाऊं के पौराणिक मंदिरों को संवारने के लिए मानसखंड मिशन के तहत सौंदर्यीकरण का कार्य गतिमान है।
गरिमामयी उपस्थिति
शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान वर्चुअल माध्यम से भाजपा जिला अध्यक्ष श्री गोविंद सामंत, श्री वाराही शक्ति पीठ ट्रस्ट के संरक्षक श्री लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, अध्यक्ष श्री हीरा बल्लभ जोशी, श्री निर्मल माहरा और श्री श्याम नारायण पाण्डे सहित कई गणमान्य व्यक्ति और स्थानीय भक्त उपस्थित रहे।
श्री वाराही धाम का नवनिर्माण न केवल श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में वृद्धि करेगा, बल्कि यह चम्पावत और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। मुख्यमंत्री का यह कदम ‘विकसित उत्तराखंड’ की दिशा में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का एक सशक्त उदाहरण है।
