उत्तराखंड में आवश्यक वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सुचारू: जमाखोरी पर सरकार की पैनी नजर

देहरादून: पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों के बीच राज्य में ईंधन और खाद्य सुरक्षा की स्थिति स्पष्ट करने के उद्देश्य से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार ने दूरदर्शन केंद्र, देहरादून में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की। इस वार्ता में उत्तराखंड सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के अपर आयुक्त, श्री पीएस पांगती ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि राज्य में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी नहीं है और सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईंधन और एलपीजी वितरण की स्थिति

श्री पांगती ने जानकारी दी कि पूरे प्रदेश में घरेलू गैस (एलपीजी) की आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। डीजल और पेट्रोल का स्टॉक भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। विशेष रूप से अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। कमर्शियल सिलेंडर के संबंध में राज्य सरकार ने एक नई एसओपी (SOP) जारी की है, जिसके तहत होटल, रेस्टोरेंट, होम-स्टे और उद्योगों को दैनिक रूप से 6,310 सिलेंडर वितरित किए जाएंगे। आगामी चारधाम यात्रा और शादियों के सीजन को देखते हुए, उत्तराखंड सरकार ने केंद्र से अप्रैल से नवंबर तक कमर्शियल एलपीजी का 100 प्रतिशत कोटा बनाए रखने और 5 प्रतिशत अतिरिक्त कोटे की मांग भी की है।

राशन कार्ड धारकों और प्रवासियों के लिए राहत

खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अंत्योदय और प्राथमिक परिवार के राशन कार्ड धारकों को बड़ी राहत दी गई है। प्रदेश के लगभग 14 लाख परिवारों को अप्रैल, मई और जून का राशन एक साथ निकटतम गल्ला केंद्रों से आवंटित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रवासी मजदूरों और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए 5 किलोग्राम के ‘छोटू सिलेंडर’ (FTL) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें केवल पहचान पत्र दिखाकर किसी भी गैस एजेंसी से प्राप्त किया जा सकता है।

पीएनजी और वैकल्पिक ईंधन का विस्तार

राज्य में ऊर्जा के आधुनिक स्रोतों पर भी युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। श्री पांगती ने बताया कि उत्तराखंड में वर्तमान में 37 हजार घरों में पीएनजी (PNG) कनेक्शन चालू हैं। गेल गैस (देहरादून), आईओसी-अडानी (ऊधम सिंह नगर), एचएनजीपीएल (हरिद्वार) और एचपीसीएल (नैनीताल) जैसी पांच कंपनियां सिटी गैस वितरण के क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही हैं। वैकल्पिक ईंधन के रूप में वन विभाग ने भी लकड़ी के टालों में पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में ईंधन की कमी न हो।

जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पैनिक बुकिंग में कमी

प्रेस वार्ता के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि पिछले दिनों देखी गई ‘पैनिक बुकिंग’ अब सामान्य हो गई है। जहाँ 15 मार्च को बुकिंग का आंकड़ा 90 हजार तक पहुँच गया था, वहीं 6 अप्रैल तक यह घटकर 45 हजार पर आ गया है। इसके साथ ही, बाजार में कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए प्रशासन अत्यंत सतर्क है। अब तक राज्य भर में 6,205 निरीक्षण और 373 छापे मारे जा चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप 19 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 7 गिरफ्तारियां हुई हैं। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनहित के साथ खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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