देहरादून: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने इतिहास रचते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू कर देश के लिए एक नजीर पेश की है। 27 जनवरी 2025 से लागू हुए इस कानून के बाद न केवल राज्य में सामाजिक समानता का नया युग शुरू हुआ है, बल्कि आम नागरिकों में कानूनी जागरूकता का भी अभूतपूर्व संचार हुआ है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण राज्य में विवाह पंजीकरण (Marriage Registration) के आंकड़ों में आई भारी उछाल है।
विवाह पंजीकरण के आंकड़ों में ऐतिहासिक उछाल
UCC के लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव आया है। आंकड़ों की तुलना करें तो यह वृद्धि चौंकाने वाली है:
यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि जहाँ पुराने कानून के तहत 14-15 वर्षों में जितने पंजीकरण हुए, उसके लगभग बराबर पंजीकरण UCC के तहत मात्र 6 महीनों में हो गए हैं।
संकल्प से सिद्धि तक का सफर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों में जनता से UCC लागू करने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में इस पर निर्णय लिया गया। व्यापक जनमत संग्रह और सभी औपचारिकताओं के बाद इसे धरातल पर उतारा गया। मुख्यमंत्री का यह निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना को साकार करता है।
UCC: महिला सशक्तिकरण और समानता का आधार
UCC का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता सुनिश्चित करना है। इस कानून के तहत कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं:
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बहुविवाह पर रोक: महिलाओं को बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है।
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समान आयु: महिला और पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु का कड़ाई से निर्धारण।
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समान अधिकार: तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर सभी धर्मों के लिए एक समान और पारदर्शी कानून।
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पंजीकरण की अनिवार्यता: विवाह के अनिवार्य पंजीकरण ने महिलाओं के कानूनी अधिकारों को सुरक्षा प्रदान की है।
“यह कानून किसी के विरुद्ध नहीं, बल्कि सबके सम्मान के लिए है” – मुख्यमंत्री
राज्य की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:
“उत्तराखण्ड में UCC लागू करना राज्य सरकार का एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम है। इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार, अवसर और सम्मान देना है। विवाह पंजीकरण में आई 24 गुना वृद्धि यह दर्शाती है कि जनता ने इस कानून को खुले दिल से स्वीकार किया है। उत्तराखण्ड ने देश को एक नई दिशा दी है।”
उत्तराखण्ड अब देश का वह मॉडल राज्य बन गया है जहाँ कानून की नजर में हर नागरिक बराबर है। UCC के माध्यम से राज्य ने न केवल महिलाओं को सशक्त किया है, बल्कि एक आधुनिक और न्यायपूर्ण समाज की नींव भी रखी है। जिस तरह से जनता इस कानून को अपना रही है, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी ‘उत्तराखण्ड मॉडल’ एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।
