देहरादून: उत्तराखंड में वनों के संरक्षण, जल संचयन और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित कैम्पा (CAMPA) संचालन समिति की 12वीं बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹339 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी दी गई है।
जल और मृदा संरक्षण: ‘बड़ी परियोजनाओं’ पर फोकस
मुख्य सचिव ने वन विभाग को निर्देश दिए कि अब छोटे-छोटे कार्यों के बजाय ‘बहुआयामी और एकीकृत’ (Integrated) प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
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डिवीजन स्तर पर कार्य: प्रत्येक वन प्रभाग (डिवीजन) को एक बड़े प्रोजेक्ट को चिन्हित कर उसका प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
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राज्य स्तरीय परियोजनाएं: जल संरक्षण के लिए ‘सारा’ और जलागम विभाग के समन्वय से राज्य स्तर पर तीन बड़ी एकीकृत परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जाएगा।
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बजट: जल धाराओं के उपचार और मृदा संरक्षण कार्यों के लिए ₹19.5 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकथाम: 10 नए रेस्क्यू सेंटर
मुख्यमंत्री की घोषणा को प्राथमिकता देते हुए बैठक में वन्यजीवों के रेस्क्यू और संघर्ष कम करने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृति दी गई:
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नए ट्रांजिट रेस्क्यू सेंटर: प्रदेश के सभी जनपदों में 10 नए ट्रांजिट रेस्क्यू सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिसके लिए ₹19 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
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सुरक्षा उपाय: मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम हेतु अतिरिक्त ₹8.6 करोड़ के बजट को भी हरी झंडी दी गई है।
वनाग्नि प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर
गर्मियों के सीजन में वनों को आग से बचाने और वन कर्मियों की सुविधाओं के लिए भी विशेष आवंटन किया गया है:
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वनाग्नि सुरक्षा: वनाग्नि प्रबंधन के लिए ₹12 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इसमें खास बात यह है कि ₹2 करोड़ सीधे वन पंचायतों को दिए जाएंगे, ताकि स्थानीय सहभागिता बढ़े।
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आवासीय सुविधा: देहरादून और हल्द्वानी में रेंजर स्तर तक के वन कर्मियों के लिए आवासीय भवनों के निर्माण हेतु ₹10 करोड़ मंजूर किए गए हैं।
पारदर्शिता और ऑडिट पर कड़ा रुख
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि कैम्पा के बजट का उपयोग पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ होना चाहिए।
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थर्ड पार्टी ऑडिट: कार्यों के स्वतंत्र मूल्यांकन के लिए 3 से 4 विशेषज्ञ एजेंसियों को सूचीबद्ध (Panel) करने के निर्देश दिए गए हैं।
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समयबद्धता: सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने और उनकी सख्त निगरानी करने पर बल दिया गया।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी
इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव सी. रविशंकर, हॉफ (HoFF) रंजन मिश्र, कैम्पा के सीईओ कपिल लाल, प्रमुख सचिव वन एस.पी. सुबुद्धि और अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित वन विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।
कैम्पा की यह कार्ययोजना उत्तराखंड के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जनसुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
