देहरादून: उत्तराखंड ने पिछले तीन वर्षों में आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर अभूतपूर्व प्रगति की है। प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीक्षी सुन्दरम ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट (2024-25) के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था न केवल तेजी से बढ़ रही है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वरोजगार के क्षेत्रों में भी नए आयाम स्थापित कर रही है।
इस वर्ष यह सर्वेक्षण राज्य सरकार ने National Council of Applied Economic Research (NCAER) के साथ मिलकर तैयार किया है।
अर्थव्यवस्था और विकास दर: एक ऊंची छलांग
राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) और प्रति व्यक्ति आय में भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो राज्य की मजबूत आर्थिक स्थिति का प्रमाण है।
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GSDP में वृद्धि: वर्ष 2021-22 में राज्य की GSDP ₹2.54 लाख करोड़ थी, जो 2024-25 में डेढ़ गुना से अधिक बढ़कर ₹3,81,889 करोड़ हो गई है।
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प्रति व्यक्ति आय: प्रति व्यक्ति आय ₹1,94,670 (2021-22) से बढ़कर अब ₹2,73,921 (2024-25) हो गई है।
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ग्रोथ रेट: इस वर्ष राज्य की विकास दर 7.23 प्रतिशत रही है।
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SDG इंडेक्स: सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में उत्तराखंड ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
गरीबी में कमी और रोजगार में बढ़ोत्तरी
सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य में बहुआयामी गरीबी में उल्लेखनीय कमी आई है और श्रम शक्ति की भागीदारी बढ़ी है।
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गरीबी दर: बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) 9.7% से घटकर 6.92% रह गया है।
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रोजगार (LFPR): लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 60.1% से बढ़कर 64.4% हो गया है, जो रोजगार के क्षेत्र में 4.3% की वृद्धि दर्शाता है।
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MSME और स्टार्टअप: MSME इकाइयों की संख्या 59,798 से बढ़कर 79,394 हो गई है। वहीं, स्टार्टअप्स की संख्या में भारी उछाल आया है, जो 2017 में शून्य थी और अब बढ़कर 1,750 पहुँच गई है।
ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
ऊर्जा उत्पादन, विशेषकर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड ने लंबी दूरी तय की है।
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विद्युत उत्पादन: विद्युत उत्पादन 5,157 MU से बढ़कर 16,500 मिलियन यूनिट पहुँच गया है।
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सौर ऊर्जा: सौर ऊर्जा उत्पादन 439 मेगावाट से बढ़कर 1027 मेगावाट हो गया है।
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हवाई संपर्क: हेलीपैड की संख्या 60 से बढ़कर 118 और हेलीपोर्ट 2 से बढ़कर 7 हो गए हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य मानकों में सुधार
राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे के साथ-साथ मानव विकास सूचकांकों पर भी विशेष ध्यान दिया है।
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शिक्षा: इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 20 से बढ़कर 52 हो गई है। डिग्री कॉलेजों की संख्या भी बढ़कर 139 पहुँच गई है।
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स्वास्थ्य: शिशु मृत्यु दर (IMR) 22 से घटकर 20 और मातृ मृत्यु दर (MMR) 103 से घटकर 91 पर आ गई है।
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स्वच्छता: राज्य में अब 100% घरों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है।
कृषि, पर्यटन और मत्स्य पालन
पारंपरिक खेती के साथ-साथ सुगंधित पौधों (Aromatic plants) और पर्यटन में भी राज्य ने प्रगति की है।
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सुगंधित खेती: मेडिसिनल एंड एरोमेटिक प्लांट का क्षेत्र 900 हेक्टेयर से बढ़कर सीधे 10 हजार हेक्टेयर पहुँच गया है।
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पर्यटन: होमस्टे की संख्या 3,935 से बढ़कर 6,161 हो गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।
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दुग्ध और मत्स्य: दुग्ध उत्पादन बढ़कर 54.59 लाख लीटर प्रतिदिन और मत्स्य उत्पादन बढ़कर 10,487 टन प्रति वर्ष हो गया है।
भविष्य का अनुमान
प्रमुख सचिव ने आशा व्यक्त की कि विकास की यह गति निरंतर बनी रहेगी। वर्ष 2026-27 के लिए राज्य की GSDP वृद्धि दर 8.2 प्रतिशतअनुमानित की गई है।
