देहरादून: उत्तराखण्ड ने आपदा प्रबंधन और पुनर्निर्माण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने वर्ष 2025 की आपदाओं से हुए नुकसान का सटीक आकलन करने हेतु तैयार पोस्ट डिजास्टर नीड एसेसमेंट (PDNA) रिपोर्ट भारत सरकार को प्रेषित कर दी है। विशेष बात यह है कि उत्तराखण्ड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने किसी एक क्षेत्र के बजाय पूरे प्रदेश का व्यापक स्तर पर PDNA सर्वेक्षण कराया है।
कुल ₹15,103 करोड़ के आर्थिक प्रभाव का आकलन
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में आपदाओं के कारण कुल ₹15,103.52 करोड़ का समग्र आर्थिक प्रभाव आंका गया है। इसे तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
-
प्रत्यक्ष क्षति (Damages): ₹3,792.38 करोड़
-
राजस्व हानि (Losses): ₹312.19 करोड़
-
पुनर्निर्माण एवं ‘बिल्ड बैक बेटर’ आवश्यकता: ₹10,998.95 करोड़
क्षेत्रवार नुकसान का विवरण: स्वास्थ्य और जलापूर्ति सर्वाधिक प्रभावित
रिपोर्ट में चार मुख्य क्षेत्रों (Sectors) में हुए नुकसान का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. सामाजिक क्षेत्र (Social Sector): कुल ₹4,966.85 करोड़ इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं सबसे अधिक प्रभावित रहीं। स्वास्थ्य क्षेत्र पर ₹2,579.47 करोड़ और आवास (Housing) पर ₹2,005.48 करोड़ का आर्थिक बोझ पड़ा है।
2. अवसंरचना क्षेत्र (Infrastructure Sector): कुल ₹6,225.69 करोड़ बुनियादी ढांचे में जलापूर्ति (Water Supply) को सबसे अधिक चोट पहुँची है, जहाँ ₹4,048.88 करोड़ का नुकसान हुआ। इसके अलावा सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से ₹1,963.29 करोड़ का प्रभाव पड़ा।
3. उत्पादक क्षेत्र (Productive Sector): कुल ₹893.94 करोड़ कृषि, बागवानी और पशुपालन के साथ-साथ पर्यटन को सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान हुआ है। अकेले पर्यटन क्षेत्र में ₹744.94 करोड़ की क्षति दर्ज की गई है।
4. क्रॉस-कटिंग सेक्टर (Cross-cutting Sector): ₹3,017.04 करोड़ इसमें भविष्य में आपदा जोखिम को कम करने (DRR) और सुरक्षात्मक ढांचा तैयार करने हेतु निवेश का आकलन किया गया है।
‘बिल्ड बैक बेटर’ (Build Back Better) का विजन
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यह रिपोर्ट केवल नुकसान का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक ‘रोडमैप’ है। राज्य सरकार का जोर केवल पुनर्निर्माण पर नहीं, बल्कि ‘बिल्ड बैक बेटर’ (बेहतर पुनर्निर्माण) सिद्धांत पर है। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए आपदा-रोधी (Disaster Resilient) अवसंरचना तैयार करना है।
केंद्र से मिलेगा वित्तीय सहयोग
इस रिपोर्ट को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को सौंप दिया गया है। इसके आधार पर केंद्र सरकार से आवश्यक वित्तीय सहायता प्राप्त होगी। इससे प्रभावित क्षेत्रों में आजीविका के संरक्षण और बुनियादी ढांचे को नए सिरे से सुदृढ़ करने में तेजी आएगी।
