अल्मोड़ा: पर्वतीय कृषि को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से हवालबाग स्थित विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में 52वें कृषि विज्ञान मेले का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष मेले की थीम “खेती में नवीनता, पोषण में श्रेष्ठता” रखी गई, जिसमें उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से आए 1500 से अधिक किसानों और कृषक उत्पादक संगठनों (FPOs) ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
भव्य शुभारंभ और मुख्य अतिथि का संबोधन
मेले का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. मांगी लाल जाट (सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, भारत सरकार एवं महानिदेशक, ICAR) द्वारा किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. देवेन्द्र कुमार यादव (उप महानिदेशक, फसल विज्ञान) और डॉ. राजबीर सिंह (उप महानिदेशक, कृषि विस्तार) उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. जाट ने संस्थान के 100 वर्षों के शानदार सफर की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने नई प्रजातियों के विकास में जो कीर्तिमान स्थापित किए हैं, वे काबिले तारीफ हैं। उन्होंने विशेष रूप से ‘वी.एल. त्रिपोषी’ और ‘सुपोषिता’ जैसी बायोफोर्टिफाइड मक्का किस्मों का उल्लेख करते हुए इन्हें पोषण सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया।
तकनीकी प्रदर्शन और ‘शताब्दी महिला छात्रावास’ का शिलान्यास
मेले की गतिविधियों की शुरुआत कृषकों के प्रक्षेत्र भ्रमण से हुई, जहाँ किसानों ने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित उन्नत फसलों और नवीन तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण ‘शताब्दी महिला छात्रावास’ का शिलान्यास रहा, जो संस्थान की विकास यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ेगा। इसके बाद अतिथियों ने प्रदर्शनी स्टालों का भ्रमण कर वैज्ञानिकों से नवीनतम शोधों और उनके व्यावहारिक उपयोग पर विस्तृत चर्चा की।
संस्थान की उपलब्धियां और प्रगतिशील किसानों का सम्मान
संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की हालिया उपलब्धियों का ब्यौरा पेश किया। उन्होंने बताया कि कैसे संस्थान पर्वतीय किसानों के कल्याण और उनकी समस्याओं के समाधान हेतु निरंतर कार्य कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया, जिससे अन्य कृषकों को भी प्रेरणा मिली।
कृषक गोष्ठी और प्रदर्शनी का आकर्षण
मेले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और सरकारी व गैर-सरकारी संगठनों द्वारा लगभग 40 प्रदर्शनियां लगाई गईं। इन स्टालों के माध्यम से किसानों को उन्नत बीज, मशीनरी और जैविक खेती के बारे में जानकारी दी गई। मेले के दौरान आयोजित ‘कृषक गोष्ठी’ में विशेषज्ञों ने पर्वतीय खेती की चुनौतियों और उनके वैज्ञानिक समाधानों पर किसानों की शंकाओं का निवारण किया।
“पर्वतीय कृषि के विकास के लिए तकनीकी हस्तांतरण और विस्तार शिक्षा का महत्व सर्वोपरि है। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई प्रजातियां सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचनी चाहिए।” – डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार)
