देहरादून: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के उपलक्ष्य में उत्तराखंड की मातृशक्ति को कानूनी सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति सशक्त बनाने के लिए राज्य महिला आयोग ने एक बड़ी पहल की है। राष्ट्रीय महिला आयोग के “महिला आयोग आपके द्वार” अभियान के अंतर्गत, उत्तराखंड राज्य महिला आयोग आगामी 9 मार्च से 13 मार्च तक पूरे प्रदेश में व्यापक जनसुनवाई अभियान चलाएगा।
आयोग का संकल्प: न्याय की मुख्यधारा में हर महिला
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल ने अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि आयोग का लक्ष्य भौगोलिक दूरियों को मिटाकर महिलाओं तक पहुँचना है।
“अक्सर भौगोलिक बाधाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की बहनें मुख्यालय तक नहीं पहुँच पातीं। हमारा संकल्प प्रदेश की प्रत्येक महिला को सुरक्षित और गरिमापूर्ण वातावरण प्रदान करना है। आयोग स्वयं उनके द्वार तक पहुँचकर उन्हें त्वरित न्याय दिलाएगा।” — श्रीमती कुसुम कंडवाल, अध्यक्ष
केवल शिकायत नहीं, जवाबदेही भी होगी तय
इस अभियान का उद्देश्य केवल नई शिकायतों को दर्ज करना नहीं है, बल्कि सिस्टम में लंबित पड़े पुराने मामलों को गति देना भी है।
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विभागीय समन्वय: जनसुनवाई के दौरान पुलिस, समाज कल्याण, स्वास्थ्य और राजस्व विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे।
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लंबित मामलों की समीक्षा: सरकारी विभागों में महिलाओं से संबंधित जो मामले लंबे समय से अटके हैं, उनकी समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
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प्राथमिकता वाले विषय: घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, संपत्ति विवाद, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, मानव तस्करी और मातृत्व लाभ जैसे गंभीर विषयों पर प्राप्त शिकायतों का प्राथमिकता से निस्तारण होगा।
जनपदवार जनसुनवाई का कार्यक्रम (9-13 मार्च 2026)
आयोग की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य व्यक्तिगत रूप से विभिन्न जनपदों में उपस्थित रहकर इन कार्यक्रमों की अध्यक्षता करेंगे:
तत्काल वैधानिक कार्यवाही की व्यवस्था
प्रत्येक जनपद में आयोजित होने वाली इस जनसुनवाई में जिलाधिकारी के साथ पुलिस प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इसकी उपस्थिति का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी गंभीर प्रकरण पर मौके पर ही वैधानिक कार्यवाही के आदेश दिए जा सकें और पीड़ित को तत्काल कानूनी सहायता मिल सके।
अध्यक्ष की अपील: निर्भीक होकर उठाएँ आवाज़
श्रीमती कुसुम कंडवाल ने प्रदेश की समस्त महिलाओं से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के भय या संकोच को त्यागकर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इन शिविरों में पहुँचें। आयोग हर उस महिला के साथ मजबूती से खड़ा है जो अपने सम्मान और अधिकारों के लिए आवाज उठाना चाहती है।
“महिला आयोग आपके द्वार” अभियान उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। यह न केवल महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली में संवेदनशीलता और तेजी भी लाएगा।
