उत्तरकाशी आपदा ने कई लोगों को कभी ना भूलने वाले जख्म दिए हैं। धराली गांव में पानी और मलबे में कई घर और होटल बह गए, जिन्हें बनाने में लोगों ने पूरी जिंदगी लगा दी। अब इन लोगों के सामने बड़ा संकट आ गया है।

धराली की आपदा कुछ लोगों को ऐसे जख्म दे गई, जो आजीवन नहीं भर पाएंगे, आपदा में सब कुछ खो गए हैं, उनका ना तो घर बचा और ना ही रोजगार का साधन। जीवन भर की कमाई से खड़े आलीशान होटल सैलाब में कहां खो गए कुछ पता नहीं है, अब उनको सिर छिपाने और रोजगार की दोहरी चिंता सता रही है। स्थानीय लोगों की माने तो धराली में 70 से ज्यादा होटल, रेस्टोरेंट और रिजॉर्ट तबाहु हुए हैं। 25 घर भी बहे हैं, बड़े सपने संजो कर लोगों ने होटल बनाए थे।
12 कमरे का होटल बह गया
धराली के पूरण सिंह ने भी इस त्रासदी को नहीं भूल पाएंगे। आलीशान होटल के साथ घर भी आपदा की भेंट चढ़ गया। होटल में करीब 12 कमरे थे। पूरण आपदा के इस कहर को भूल नहीं पा रहा हैं।
घर और 40 कमरों का होटल बह गया
जयभगवान सिंह पंवार ने बताया कि आपदा में उनका घर और 40 कमरों का होटल बह गया, धराली में उनका सबसे बड़ा होटल था। 200 सेब के पेड़ों का बागीचा भी तबाह हो गए, खुद आपदा के दिन परिवार के साथ देहरादून थे, जिससे जान बच गई।
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महावीर का होटल भी आपदा की भेंट चढ़ा
धराली के महावीर पंवार को आपदा जीवन भर न भरने वाले जख्म दे गई। महावीर ने इस आपदा ने अपने बेटे को खोया है। बेटे का शव बीते बुधवार को मलबे में मिला। घर और होटल भी आपदा की भेंट चढ़ गया, बेघर परिवार को अब भविष्य की चिंता सता रही है।
परिवार के लोगों ने भाग कर जान बचाई
बुद्धि सिंह का परिवार भी बेघर हो गया। उनका घर आपदा की भेंट चढ़ा। 14 कमरों का होटल तबाह हुआ। परिवार के लोगों ने भागकर जान बचाई। आसपास के लोगों के यहां शरण ले रखी है। जीवनभर की कमाई से होटल बनाया था।
