दीदी रोना नहीं आपका भाई साथ है.. उत्तरकाशी में पीड़ितों को हौसला दे रहे CM धामी

उत्तरकाशी में आपदा के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ग्राउंड जीरो पर पहुंच गए। वो पिछले दो दिनों से लगातार मौके पर डटे हुए हैं और पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड कर रहे हैं। इसके अलावा पीड़ितों का हौसला भी सीएम बढ़ा रहे हैं।

उत्तरकाशी में आपदा के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ग्राउंड जीरो पर पहुंच गए। वो पिछले दो दिनों से लगातार मौके पर डटे हुए हैं और पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड कर रहे हैं। इसके अलावा पीड़ितों का हौसला भी सीएम बढ़ा रहे हैं।

धराली में आपदा के बाद आंध्रप्रदेश का दौरा रद करके लौटे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 48 घंटे से ग्राउंड जीरो पर जमे हैं। बुधवार को धराली, हर्षिल में लोगों का दर्द बांटकर गुरुवार को धामी पौड़ी पहुंच गए। पौड़ी में सीएम को अपने बीच पाकर आपदा पीड़ित महिलाएं भावुक हो गईं तो सीएम भी खुद को भावनाओं में बहने से नहीं रोक पाए। सीएम ने महिलाओं को ढांढस बंधाते हुए कहा, ‘दीदी रोना नहीं आपका ये भाई, हमेशा आपके साथ है।’

48 घंटे से पूरे ऑपरेशन पर नजर

महिलाओं को गले लगाए और लोगों से मिलते धामी के फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। इससे पहले भी धामी आपदा आदि मौके पर सबसे पहले पहुंचकर अपनी कैबिनेट के लिए उदाहरण खड़े कर चुके हैं। इस बार भी धामी पिछले 48 घंटे से पूरे ऑपरेशन पर नजर रखे हैं। दिनभर आपदा पीड़ितों से मिलना, सेना के जवानों के बीच रहकर उनका उत्साह बढ़ाना और शाम से शुरू होकर देर रात तक अफसरों के साथ बैठक जारी है। उनके प्रो-एक्टिव रहने के कारण पहले भी पीड़ितों को फायदा हुआ है इस बार भी प्रदेश के मुखिया के मौके पर रहने से सरकारी मशीनरी हाईअलर्ट मोड पर काम कर रही है। यही वजह है कि जिस भटवाड़ी-गंगनानी मार्ग के दुरुस्त होने में हफ्ता भर लगने का अनुमान लगाया जा रहा था, वो गुरुवार शाम तक छोटे वाहनों के लिए शुरू हो चुकी है।

पहले भी मुश्किल घड़ी में ऐसे ही संभालते रहे हैं कमान

यह पहला मौका नहीं जब धामी ने मुश्किल घड़ी में आगे बढ़कर कमान संभाली। इससे पहले पिछले साल उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल हादसे के दौरान पूरे अभियान में धामी ग्राउंड जीरो पर डटे रहे थे। 12 नवंबर 2023 को टनल में मलबा आने से वहां 41 श्रमिक फंस गए थे। तब 17 दिन तक वहां रेस्क्यू अभियान चला। धामी आखिरी दिन 28 नवम्बर देर शाम सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर न निकालने के बाद मौके से हटे। बीते साल केदारनाथ में अतिवृष्टि की वजह से आपदा के हालात पैदा होते देख मुख्यमंत्री ने तत्काल ही यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान की शुरुआत भी करा दी थी। आपदा प्रबंधन विभाग के दावे के अनुसार 15 हजार के करीब लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया था। 31 जुलाई को जब तक सभी लोग सुरक्षित न निकल आए तब तक धामी कंट्रोल रूम के टच में रहे।

धामी आपदा राहत में देंगे वेतन

धामी ने अपने एक माह के वेतन को आपदा राहत कार्यों में देने की घोषणा की है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों से भी अपील की कि वे अपनी क्षमता के अनुसार राहत कार्यों में सहयोग करें।

हर मुश्किल घड़ी में फौरन फैसला

हर मुश्किल घड़ी में धामी ने त्वरित फैसला लेकर विवादों का जल्द समाधान के कई उदाहरण पेश किए हैं। वनभूलपुरा कांड में दंगाई के खिलाफ सख्त फैसला भी इसमें एक है। भर्तियों में घपले के बाद सख्त नकल कानून, जबरन धर्मांतरण कानून, महिला आरक्षण को लेकर भी सरकार ने फैसला लेने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई।

धामी की कार्यशैली के पीएम भी कायल

त्वरित फैसले और हर चुनौतीपूर्ण वक्त में स्वयं आगे बढ़कर मुकाबला करने के धामी के जज्बे का भाजपा हाईकमान भी कायल है। सिलक्यारा टनल मामले में जब धामी को घेरने की कोशिश की गई तब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारीफ कर विरोध के सभी स्वर को खत्म कर दिया था। न केवल प्रधानमंत्री बल्कि गृहमंत्री अमित शाह सभी नेता मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली की खुलकर तारीफ करते हैं।

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