देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल के पंचायत चुनावों (अगस्त 2025) में भाजपा की शानदार जींड की त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में भाजपा ने 12 जिलों में से 11 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। हरिद्वार को छोड़कर सभी जिलों में भाजपा का दबदबा रहा, जहां कांग्रेस को कोई बड़ा झटका नहीं लगा।
1. जबरदस्त जीत: देहरादून जैसे महत्वपूर्ण जिले में भी भाजपा ने जीत हासिल की, जो राज्य की राजधानी होने के नाते रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, भाजपा ने 10 जिला पंचायत अध्यक्ष पद जीते, जबकि कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा। निर्दलीय उम्मीदवारों ने कुछ सीटें जीतीं, लेकिन यह भाजपा की ताकत को कम नहीं कर सका।
इस जीत को “ट्रिपल इंजन” सरकार की सफलता बताया जा रहा है, जहां केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर भाजपा का समन्वय काम आया। ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा की जड़ें मजबूत हुईं, जहां 70 विधानसभा सीटों में से आधी से ज्यादा पर ग्रामीण वोट निर्णायक होते हैं। यह परिणाम विपक्ष के लिए चेतावनी है। कांग्रेस ने संगठनात्मक कमजोरियों के कारण कड़ी चुनौती नहीं दे सकी, और उनके कई बड़े नेता हार गए। धामी ने इसे “विपक्ष की हार” बताते हुए कहा कि कांग्रेस अब असेंबली में हंगामा करके अपनी हताशा निकाल रही है।
2. धामी की रणनीति: जमीनी स्तर पर मजबूती और समन्वय
धामी की रणनीति मुख्य रूप से संगठनात्मक मजबूती, विकास कार्यों पर फोकस और विपक्ष की कमजोरियों का फायदा उठाने पर आधारित रही। यहां प्रमुख बिंदु हैं
संगठन और टीमवर्क का मजबूत समन्वय: भाजपा ने सरकार और पार्टी संगठन के बीच बेहतरीन तालमेल बनाया। धामी ने खुद ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई, जहां पार्टी को चुनौतियां थीं। कार्यकर्ताओं को जोश भरने के लिए बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाई गई। जाति, भौगोलिक और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर उम्मीदवार चुने गए, जिससे विपक्ष को कोई सेंध लगाने का मौका नहीं मिला।
विकास और स्थिर शासन पर जोर: पिछले तीन वर्षों में धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की, जो भाजपा की प्रमुख उपलब्धि रही। इसके अलावा, लखवार, सोंग डैम और जमराणी डैम जैसी लंबित परियोजनाओं में प्रगति हुई। पंचायत चुनावों में ग्रामीण वोटरों को विकास योजनाओं (जैसे बेरोजगारी, शिक्षा और स्थानीय भ्रष्टाचार पर फोकस) के जरिए जोड़ा गया। धामी ने विपक्ष पर “अशांति फैलाने” का आरोप लगाकर अपनी स्थिर छवि मजबूत की।

विपक्ष की कमजोरियों का शोषण: कांग्रेस में आंतरिक कलह और संगठनात्मक कमजोरी रही। हरक सिंह रावत जैसे नेताओं की सक्रियता से कुछ जोश आया, लेकिन पंचायत स्तर पर यह नाकाफी साबित हुआ। भाजपा ने कांग्रेस की “जुगलबंदी” को अपनी टेंशन बताया, लेकिन जमीनी स्तर पर कांग्रेस को अलग-थलग कर दिया। धामी ने EVM और चुनाव आयोग पर कांग्रेस के आरोपों को “पुरानी आदत” बताकर खारिज किया।

ट्रिपल इंजन” का नारा: यह धामी का मुख्य हथियार रहा, जो केंद्र (मोदी सरकार), राज्य (धामी सरकार) और स्थानीय निकायों के बीच तालमेल पर जोर देता है। इससे वोटरों में विश्वास बढ़ा, और विपक्ष को “विरोध के लिए विरोध” करने वाला साबित किया।
X (पूर्व ट्विटर) पर भी #धामी_की_धाकड़_रणनीति ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स भाजपा की जीत को 2027 का रोडमैप बता रहे हैं। एक पोस्ट में कहा गया, “धामी की जीत ने विपक्ष की नींद उड़ा दी, अब 2027 की राह और आसान।”
3. क्या रणनीति काम आई? सफलता के सबूत
हां, पूरी तरह काम आई:पंचायत चुनाव भाजपा के लिए “ट्रायल रन” थे, और जीत ने साबित कर दिया कि धामी की दूरदृष्टि सही है। 2022 विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 47 सीटें जीतीं, और अब ग्रामीण आधार मजबूत होने से 2027 में हैट्रिक की संभावना बढ़ गई। विपक्ष की हार ने उनके मनोबल को तोड़ा, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह है।

चुनौतियां बाकी: कांग्रेस ने पंचायत स्तर पर कुछ वापसी की कोशिश की, और निर्दलीयों की बढ़ती लोकप्रियता भाजपा के लिए अलर्ट है। लेकिन धामी की हिंदुत्व एजेंडा (जैसे अवैध मस्जिदों पर कार्रवाई, लव जिहाद विरोधी कानून) ने उनके कोर वोट बैंक को एकजुट रखा। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण वोटरों का भरोसा भाजपा की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।
2027 का रोडमैप: धामी ने स्पष्ट कहा कि यह जीत 2027 के लिए आधार तैयार करती है। पार्टी अब बूथ स्तर पर और मजबूती लाएगी, और विकास मुद्दों पर फोकस करेगी। विपक्ष को संगठन सुधारने होंगे, वरना भाजपा का दबदबा जारी रहेगा।
कुल मिलाकर, धामी की रणनीति ने न सिर्फ विपक्ष को कमजोर किया, बल्कि भाजपा को राज्य की राजनीति में अजेय बना दिया। यह जीत स्थिर शासन और जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है, जो 2027 में और मजबूत साबित होगी।

