देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की ग्रेजुएट लेवल भर्ती परीक्षा (21 सितंबर 2025 को आयोजित) में कथित पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे “नकल जिहाद” (cheating jihad) करार दिया है। उनके अनुसार, यह धामी सरकार के सख्त एंटी-चीटिंग कानूनों (2023 का उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम) के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश है, जिसका उद्देश्य राज्य सरकार को बदनाम करना, युवाओं को भड़काना और भर्ती प्रक्रिया को पटरी से उतारना है।
1. साजिश की प्रकृति: नकल माफिया और कोचिंग सेंटरों का गठजोड़
– धामी सरकार का दावा है कि चीटिंग माफिया, कोचिंग सेंटर और कुछ असंतुष्ट तत्व मिलकर “नकल जिहाद” चला रहे हैं। यह माफिया सरकार के सख्त कानूनों से परेशान है, जो संगठित नकल पर आजीवन कारावास और 10 करोड़ तक जुर्माना लगाने की व्यवस्था करता है।
– 2021 से अब तक 100 से अधिक नकल गिरोहों को पकड़ा गया है, जिससे माफिया सरकार को बदनाम करने के लिए पेपर लीक जैसी घटनाओं को हथियार बना रहे हैं। इस घटना में मुख्य आरोपी खालिद मलिक (हरिद्वार से गिरफ्तार) ने परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र की फोटो खींची और अपनी बहन सबिया के माध्यम से वायरल की, लेकिन यह सफल नकल का प्रयास था, पूर्ण लीक नहीं।
– भाजपा विधायक खजान दास ने इसे स्पष्ट रूप से “धामी सरकार के खिलाफ साजिश” बताया है।
2. बदनाम करने के तरीके: सोशल मीडिया और विरोध प्रदर्शन
– सोशल मीडिया पर एडिटेड वीडियो और फर्जी खबरें फैलाकर छात्र आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उदाहरण के लिए, देहरादून और हल्द्वानी में छात्रों के विरोध को “राजनीतिक” बताकर सरकार पर दबाव बनाने की साजिश रची गई।
– विपक्षी दल (जैसे कांग्रेस) इसे “भाजपा का भर्ती घोटाला” बताकर सरकार को घेर रहे हैं, जबकि धामी इसे पुरानी घटनाओं (2021-2022 के लीक) से जोड़कर सरकार की उपलब्धियों (25,000+ नौकरियां) को कमतर करने की कोशिश बता रहे हैं।
– एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #धामी_सरकार_जवाब_दो जैसे हैशटैग से प्रचार किया जा रहा है, लेकिन सरकार इसे माफिया की रणनीति मानती है।
3. सरकार का जवाब: शून्य सहनशीलता और जांच
– एक रिटायर्ड हाईकोर्ट जज के नेतृत्व में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की गई है, जो 1 महीने में रिपोर्ट देगी। परीक्षा परिणाम रोके गए हैं, और नागरिक सीधे SIT से संपर्क कर सकते हैं।
– धामी ने कहा, “यह पूर्ण लीक नहीं, बल्कि नकल का असफल प्रयास था। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” पुलिस ने 5 टीमें लगाईं, और आरोपी हाकम सिंह (2021 लीक का आरोपी) को भी दोबारा पकड़ा गया।
– सरकार का कहना है कि जामर काम कर रहे थे, और यह “एक व्यक्ति या छोटे समूह” का प्रयास था, न कि संगठित गिरोह।
4. राजनीतिक संदर्भ और व्यापक प्रभाव
– यह साजिश केवल UKSSSC तक सीमित नहीं; विपक्ष (कांग्रेस, AAP) इसे राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक मुद्दे से जोड़कर भाजपा सरकारों (उत्तर प्रदेश, गुजरात) को निशाना बना रहे हैं। उदाहरण के लिए, AAP नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा, “भाजपा शासित राज्यों में ही पेपर लीक की कहानी दोहराई जा रही है।”
– छात्र संगठन (उत्तराखंड बेरोजगार संघ) CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन धामी इसे माफिया द्वारा भड़कावे का हिस्सा मानते हैं।
धामी सरकार के अनुसार, यह साजिश नकल माफिया की है जो सख्त कानूनों से बदला लेने के लिए सोशल मीडिया, विरोध और राजनीतिक दबाव का सहारा ले रही है। जांच पूरी होने पर पूरी सच्चाई सामने आएगी, लेकिन फिलहाल सरकार इसे “युवाओं के भविष्य से खिलवाड़” रोकने की लड़ाई बता रही है।
