बड़ी बातें:
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उत्तराखंड के इतिहास का सबसे बड़ा सर्वे: 13 जिले, 130 रिपोर्टर और ग्राउंड जीरो से जनता की आवाज।
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युवाओं और महिलाओं ने सीएम धामी पर जताया सबसे ज्यादा भरोसा।
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अगर आज चुनाव हुए तो बीजेपी को मिल सकती हैं 52-54 सीटें।
देहरादून: क्या उत्तराखंड में एक बार फिर कमल खिलने को तैयार है? क्या पुष्कर सिंह धामी की लोकप्रियता विपक्ष पर भारी पड़ रही है? ‘मूड ऑफ उत्तराखंड’ के सबसे बड़े सर्वे ने राज्य की सियासी नब्ज टटोलने की कोशिश की है। 13 जिलों में 130 रिपोर्टरों ने जब जनता के बीच जाकर राय जानी, तो नतीजे चौंकाने वाले रहे।
सर्वे के मुताबिक, 68 प्रतिशत लोगों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपनी पहली पसंद बताया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि पहाड़ की जनता, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी सरकार के बारे में क्या सोचते हैं।

( सर्वे के अनुसार, सीएम धामी की ‘ईजी टू एक्सेस’ छवि उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बना रही है)
1. क्यों हैं धामी जनता की पहली पसंद?
जनता ने सीएम धामी के पक्ष में जो राय दी है, उसके पीछे कई ठोस वजहें निकलकर सामने आई हैं:
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जनता से सीधा जुड़ाव (Connect): लोगों का मानना है कि सीएम धामी में आम आदमी से कनेक्ट करने की अद्भुत क्षमता है।
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ईजी टू एक्सेस (Easy to Access): युवाओं ने उन्हें आसानी से उपलब्ध होने वाला मुख्यमंत्री बताया है।
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ग्राउंड मॉनिटरिंग: हर छोटी-बड़ी घटना और कार्यक्रमों की सीएम खुद मॉनिटरिंग करते हैं।
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दुर्गम क्षेत्रों का दौरा: सीएम धामी दूरस्थ और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंचने से नहीं हिचकिचाते।
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पीएम मोदी का विश्वास: राज्य के विकास की चिंता और केंद्रीय मंत्रियों से बेहतर तालमेल ने उन्हें पीएम मोदी का विश्वासपात्र बनाया है, जिससे कई केंद्रीय योजनाएं प्रदेश में आईं।
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जीरो टॉलरेंस: भ्रष्टाचार पर सख्त रवैया और रोजगार को लेकर उनकी सोच ने उन्हें जनता के करीब लाया है।
2. डेमोग्राफिक्स: किसने कितना जताया भरोसा?
सर्वे में हर वर्ग ने अपनी राय खुलकर रखी है। आंकड़े बताते हैं कि महिला और युवा वोट बैंक पर सीएम धामी की पकड़ मजबूत है।

3. बुजुर्गों की राय: “काम में पारदर्शिता आई है”
राज्य के 67% बुजुर्गों का मानना है कि अभी सब ठीक चल रहा है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री मेहनत कर रहे हैं और पिछले चार सालों में कामकाज में पारदर्शिता (Transparency) आई है।
हालांकि, 22% बुजुर्ग मानते हैं कि:
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सरकार में दूरदर्शिता की थोड़ी कमी है।
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जिला स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता का अभाव एक समस्या है।
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बड़े बदलाव के लिए और कड़े फैसलों की जरूरत है।

4. विपक्ष का हाल: कांग्रेस में ‘चेहरे’ को लेकर असमंजस
सर्वे में 25% लोगों ने माना कि विपक्ष में बिखराव के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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युवा नेतृत्व की मांग: लोगों का कहना है कि कांग्रेस के ज्यादातर नेता उम्रदराज हैं, पार्टी को किसी युवा चेहरे को कमान सौंपनी चाहिए।
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मुद्दे: भ्रष्टाचार, नकल माफिया और पलायन रोकने में नाकामी को विपक्ष ने मुद्दा बनाया है, लेकिन जनता विपक्ष के मौजूदा स्वरूप से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है।
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UKD का हाल: उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) को लेकर जनता की राय तीखी है। लोगों का मानना है कि वहां कोई बड़ा नेता नहीं बचा है और पार्टी के नाम का इस्तेमाल केवल निजी स्वार्थ के लिए हो रहा है।

5. वर्डिक्ट: अगर आज चुनाव हों तो किसकी सरकार?
सर्वे का सबसे अहम हिस्सा सीटों का अनुमान है। अगर अभी राज्य में चुनाव होते हैं, तो बीजेपी एक तरफा जीत की ओर बढ़ती दिख रही है।
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बीजेपी (पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में): 52 – 54 सीटें
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कांग्रेस: 11 – 16 सीटें

निष्कर्ष: ‘मूड ऑफ उत्तराखंड’ सर्वे स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की लोकप्रियता अभी भी चरम पर है। जहां एक तरफ विपक्ष नेतृत्व के संकट और अंदरूनी कलह से जूझ रहा है, वहीं सीएम धामी की सक्रियता और ‘विकास पुरुष’ वाली छवि ने उन्हें राज्य के लोगों, खासकर युवाओं और महिलाओं का चहेता बना दिया है।
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