मसूरी/देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। मसूरी में आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर के दूसरे दिन ‘विकसित उत्तराखण्ड @ 2047’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए ठोस, सहभागी और दीर्घकालिक रणनीतियों पर गहन मंथन किया गया। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में राज्य के शीर्ष नौकरशाहों ने भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं का खाका खींचा।
1. इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन (प्रथम सत्र)
प्रमुख सचिव श्री आर. के. सुधांशु की अध्यक्षता में हुए पहले सत्र का केंद्र ‘पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन’ रहा।
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प्रमुख बिंदु: उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य के लिए जल स्रोतों, वनों और जैव विविधता का संरक्षण केवल जरूरत नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि का आधार है।
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रणनीति: आपदा प्रबंधन और जलवायु सहनशीलता (Climate Resilience) को हर योजना का हिस्सा बनाने पर सहमति बनी, ताकि विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों को भी बचाया जा सके।
2. ‘बॉटम-अप’ एप्रोच: पंचायतों और स्थानीय निकायों का सशक्तिकरण (द्वितीय सत्र)
सचिव श्री नितेश झा की अध्यक्षता वाले दूसरे सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि विकास का पहिया केवल शहरों तक सीमित न रहे।
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स्थानीय नियोजन: नीचे से ऊपर (Bottom-up) की योजना प्रक्रिया को अपनाने पर बल दिया गया। यानी योजनाएं देहरादून के दफ्तरों में नहीं, बल्कि स्थानीय गांव और पंचायतों की जरूरतों के हिसाब से बनेंगी।
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संस्थागत सशक्तिकरण: ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों को विकास का ‘वास्तविक वाहक’ बनाने के लिए उन्हें और अधिक अधिकार और संसाधन देने की रूपरेखा तैयार की गई।
3. वित्तीय सुशासन और सुरक्षा (अंतिम सत्र)
तीसरे सत्र में सचिव श्री शैलेश बगौली और श्री दिलीप जावलकर के नेतृत्व में राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य और प्रशासनिक दक्षता पर चर्चा हुई।
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राजस्व वृद्धि: राज्य के स्वयं के राजस्व स्रोतों को बढ़ाने और वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता लाने पर जोर दिया गया।
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सुरक्षा एवं तकनीक: साइबर सुरक्षा, नागरिक पुलिस और तकनीक-सक्षम शासन (Tech-enabled Governance) को सुशासन की कुंजी बताया गया। युवाओं के कल्याण और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से जनविश्वास जीतने का लक्ष्य रखा गया।
मुख्य सचिव के निर्देश: “अब जिला स्तर पर बनेगी कार्ययोजना”
चिंतन शिविर के समापन पर मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राज्य स्तर पर ‘विकसित उत्तराखण्ड–2047’ का विजन तैयार किया गया है, अब उसी तर्ज पर प्रत्येक जनपद के लिए ‘विकसित जिला कार्ययोजना’ तैयार की जाए।
“विज़न–2047 के लक्ष्यों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना है। विभागों की निरंतर समीक्षा और मूल्यांकन किया जाएगा ताकि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।” — आनंद बर्धन, मुख्य सचिव
चिंतन शिविर के प्रमुख स्तंभ:
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पर्यावरण: जलवायु सहनशीलता और संसाधन संरक्षण।
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भागीदारी: पंचायतों और स्थानीय निकायों की सक्रिय भूमिका।
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वित्तीय प्रबंधन: राजस्व में वृद्धि और पारदर्शिता।
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प्रशासन: तकनीक आधारित समयबद्ध निर्णय।
यह चिंतन शिविर उत्तराखंड के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़े बदलाव का संकेत है। सीएम धामी के विजन के अनुरूप अब अधिकारी फाइलों से बाहर निकलकर 2047 के समृद्ध उत्तराखंड की नींव रखने के लिए रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
