धामी सरकार के 54 महीने: रोजगार का ‘गोल्डन एरा’, हर महीने औसतन 518 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी

देहरादून: उत्तराखंड में पिछले साढ़े चार साल (54 महीने) का समय युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने न केवल रिक्त पदों को भरने में रिकॉर्ड कायम किया है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की शुचिता और युवाओं के कौशल विकास पर भी अभूतपूर्व कार्य किया है।

आंकड़ों में सरकारी रोजगार का सफर

जुलाई 2021 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो धामी सरकार ने युवाओं को सरकारी सेवा में लाने के लिए मिशन मोड में काम किया है:

  • कुल सरकारी नियुक्तियाँ: 28,500+ युवा

  • मासिक औसत: 518 युवा प्रति माह

  • प्रमुख भर्ती एजेंसियाँ: लोक सेवा आयोग (UKPSC), अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC), और चिकित्सा सेवा चयन आयोग।

अगले एक वर्ष के लिए भी विभिन्न आयोगों ने भर्तियों का कैलेंडर तैयार किया है, जिससे यह आंकड़ा आने वाले समय में और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

नकल विरोधी कानून: पारदर्शिता की नई पहचान

उत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य बना जिसने फरवरी 2023 में अत्यंत सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। इस कानून ने भर्ती माफिया के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।

कानून के सकारात्मक प्रभाव:

  1. समय की बचत: पहले जो भर्ती प्रक्रिया 2-3 साल खींचती थी, वह अब औसतन एक साल में पूरी हो रही है।

  2. पारदर्शिता: मेधावी युवाओं का भरोसा तंत्र पर लौटा है। अब एक-एक प्रतिभाशाली युवा अपनी मेहनत के दम पर एक से अधिक विभागों की परीक्षाओं में चयनित हो रहा है।

विदेश में रोजगार: कौशल उन्नयन से मिली नई उड़ान

सरकार केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना (शुरुआत: 9 नवंबर 2022) के जरिए उत्तराखंड के युवाओं के लिए विदेशों के दरवाजे भी खुल गए हैं।

  • प्रमुख क्षेत्र: आतिथ्य (Hospitality), नर्सिंग और ऑटोमोबाइल।

  • वैश्विक पहुंच: वर्तमान में युवाओं को प्रशिक्षित कर जर्मनी और जापान भेजा जा रहा है।

  • प्रगति: अब तक 154 युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 37 युवा जापान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री का विजन: “रोजगार और स्वरोजगार के प्रति प्रतिबद्धता”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट कहना है कि उनकी सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। सख्त कानून और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के साथ-साथ सरकार का फोकस स्वरोजगार पर भी है, ताकि युवा ‘जॉब सीकर’ के बजाय ‘जॉब गिवर’ बन सकें।

“हमारी सरकार युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए संकल्पबद्ध है। पारदर्शी व्यवस्था के कारण ही आज राज्य का युवा सुरक्षित महसूस कर रहा है।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री